देश में हैंड मेड इन इंडिया की डिमांड भी बढ़ रही : मोदी

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नई दिल्ली। 
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को वीडियो कॉन्फ़्रेंसिंग के माध्यम से भारत खिलौना मेला 2021 का उद्घाटन किया। देसी खिलौनों को बढ़ावा देने के मकसद से आयोजित ये वर्चुअल मेला 4 दिन तक चलेगा। पीएम मोदी ने इस मौके पर कहा कि आप सभी से बात करके ये पता चलता है कि हमारे देश के खिलौना उद्योग में कितनी बड़ी ताकत छिपी हुई है। इस ताकत को बढ़ाना, इसकी पहचान बढ़ाना,आत्मनिर्भर भारत अभियान का बहुत बड़ा हिस्सा है। ये पहला टॉय फेयर केवल एक व्यापारिक या आर्थिक कार्यक्रम भर नहीं है। ये कार्यक्रम देश की सदियों पुरानी खेल और उल्लास की संस्कृति को मजबूत करने की एक कड़ी है।

सिंधुघाटी सभ्यता, मोहनजो-दारो और हड़प्पा के दौर के खिलौनों पर पूरी दुनिया ने रिसर्च की है। प्राचीन काल में दुनिया के यात्री जब भारत आते थे, तो भारत में खेलों को सीखते भी थे, और अपने साथ लेकर भी जाते थे। आज टॉय फेयर के इस अवसर पर हम सभी की जिम्मेदारी है कि हम इस ऊर्जा को आधुनिक अवतार दें, इन संभावनाओं को साकार करें। अगर आज मेड इन इंडिया की डिमांड है तो आज हैंड मेड इन इंडिया की डिमांड भी उतनी ही बढ़ रही है।

भारतीय खिलौने सामाजिक-भौगोलिक परिवेश से जुड़े हैं

पीएम मोदी ने कहा कि आज जो शतरंज दुनिया में इतना लोकप्रिय है, वो पहले चतुरंग या चादुरंगा के रूप में भारत में खेला जाता था। आधुनिक लूडो तब पच्चीसी के रुप में खेला जाता था। हमारे धर्मग्रन्थों में भी बाल राम के लिए अलग-अलग कितने ही खिलौनों का वर्णन मिलता है। रियूज और रिसाइक्लिंग जिस तरह भारतीय जीवनशैली का हिस्सा रहे हैं, वही हमारे खिलौनों में भी दिखता है। ज्यादातर भारतीय खिलौने प्राकृतिक और इको फ्रेंडली चीजों से बनते हैं, उनमें इस्तेमाल होने वाले रंग भी प्राकृतिक और सुरक्षित होते हैं। हमारे यहां खिलौने ऐसे बनाए जाते थे जो बच्चों के चहुंमुखी विकास में योगदान दें। आज भी भारतीय खिलौने आधुनिका फैंसी खिलौनों की तुलना में कहीं सरल और सस्ते होते हैं, सामाजिक-भौगोलिक परिवेश से जुड़े भी होते हैं।

बच्चों के विकास में खिलौनों की अहम भूमिका

पीएम मोदी ने गुरुदेव रवींद्र नाथ टैगोर की एक कविता का जिक्र करते हुआ कहा कि एक खिलौना बच्चों को खुशियों की अनंत दुनिया में ले जाता है। खिलौना का एक-एक रंग बच्चे के जीवन में कितने ही रंग बिखेरता है। उन्होंने कहा कि हमारी परंपराओं, खानपान, और परिधानों में ये विविधताएं एक ताकत के रूप में नजर आती है। इसी तरह भारतीय टॉय इंडस्ट्री भी इस यूनिक इंडियन पर्सपेक्टिव को, भारतीय विचारबोध को प्रोत्साहित कर सकती हैं। खिलौनों का जो वैज्ञानिक पक्ष है, बच्चों के विकास में खिलौनों की जो भूमिका है, उसे अभिभावकों को समझना चाहिए और अध्यापकों को स्कूलों में भी उसे प्रयोग करना चाहिए। इस दिशा में देश भी प्रभावी कदम उठा रहा है, व्यवस्था में जरूरी कदम उठा रहा है।

देश में टॉय टूरिज्म की संभावनाएं मजबूत हो रही हैं

पीएम मोदी ने कहा कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में प्ले-आधारित और गतिविधि-आधारित शिक्षा को बड़े पैमाने पर शामिल किया गया है। ये ऐसी शिक्षा व्यवस्था है जिसमें बच्चों में पहेलियों और खेलों के माध्यम से तार्किक और रचनात्मक सोच बढ़े, इस पर विशेष ध्यान दिया गया है। देश ने खिलौना उद्योग को 24 प्रमुख क्षेत्रों में दर्जा दिया है। नेशनल टॉय एक्शन प्लान भी तैयार किया गया है। इसमें 15 मंत्रालयों और विभागों को शामिल किया गया है ताकि ये उद्योग प्रतिस्पर्धी बने, देश खिलौनों में आत्मनिर्भर बनें और भारत के खिलौने दुनिया में जाएं। इस पूरे अभियान में राज्यों को बराबर का भागीदार बनाकर टॉय क्लस्टर विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है। इसके साथ ही देश टॉय टूरिज्म की संभावनाओं को भी मजबूत कर रहा है।

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