क्या है गैब? जिसके सहारे डॉनल्ड ट्रम्प कर रहें हैं वापसी

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नई दिल्ली। कट्टरपंथियों, रूढ़िवादियों और दक्षिणपंथियों के लिए पनाह के तौर पर जिस सोशल मीडिया नेटवर्क की चर्चा है, वो है गैब। 6 जनवरी को अमेरिका के कैपिटल हिल में हिंसा के बाद से ‘Parler’ नेटवर्क को इंटरनेट की दुनिया में बड़ी आलोचना झेलनी पड़ी तो गैब नया विकल्प बनकर उभरा। हिंसा के बाद के दिनों में गैब ने ट्वीट करके दावा किया एक हफ्ते में उसने 23 लाख नए यूज़र पाए। जनवरी के आखिर तक गैब के पास कुल करीब 34 लाख यूज़र होने के आंकड़े थे।

क्या है गैब?

सबके लिए बोलने की आज़ादी के मिशन का प्रचार करते हुए 2016 में बना गैब वास्तव में ट्विटर और फेसबुक का कॉकटेल दिखता है। यहां यूज़र अपनी पोस्ट को गैब्स कहते हैं। इसमें 300 शब्दों तक का संदेश पोस्ट कर सकते हैं। यहां यूज़रों के कंटेंट को लेकर कोई सेंसर या निगरानी जैसी स्थिति नहीं है।

गैब अपने वेब ब्राउज़र ‘डिसेंटर’ की सुविधा देता है और इसका अपना कमेंटिंग सिस्टम है। इस प्लेटफॉर्म की फिलॉसफी है कि ‘हमें लगता है कि ऑनलाइन कंटेंट का भविष्य यूज़र के ही हाथ में है और ओपन है।’

कैपिटल हिल हिंसा में रहा बड़ा हाथ

पिछले कुछ समय में सोशल मीडिया के बड़े और लीडिंग प्लेटफॉर्म्स कंटेंट को लेकर अपनी पॉलिसी रखते हैं या उन पर इस तरह का दबाव है, वहीं गैब ऐसी पॉलिसी न रखने के कारण आलोचना का शिकार रहा है। इस प्लेटफॉर्म पर धड़ल्ले से नफरत, नस्लभेदी, हिंसक और भ्रामक सूचनाओं व कमेंट्स होते हैं। कहा जाता है कि कैपिटल हिल हिंसा के लिए यहां काफी भड़काने वाले पोस्ट किए गए थे।

विवादों में रहने की वजह यह भी है कि यह प्लेटफॉर्म उन लोगों का अड्डा बन गया, जिन्हें ट्विटर या अन्य प्लेटफॉर्मों से निकाला गया। रिचर्ड स्पेंसर और एलेक्स जोन्स जैसे रूढ़िवादियों ने मुख्यधारा के सोशल मीडिया से बैन किए जाने के बाद गैब को अपना ठिकाना बनाया। प्रेसिडेंट ट्रंप को लेकर भी इसी तरह की चर्चाएं ज़ोरों पर चल रही हैं।

कौन चलाता है गैब?

खुद को ‘कंज़र्वेटिव रिपब्लिकन ईसाई’ कहने वाले उद्यमी एंड्रयू तोर्बा गैब के संस्थापक हैं, जिन्हें ट्रंप का सीधा सपोर्टर माना जाता है। जब ऐसा कहा जाने लगा था कि फेसबुक कंज़र्वेटिव लोगों के खिलाफ एक धारणा रखता है, तब सिलिकन वैली में काम करने वाले तोर्बा ने उन लोगों के लिए एक विकल्प के तौर पर यह प्लेटफॉर्म बनाया।

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