डॉ. रेनू भगत ने कहा- डॉक्टरों पर जनता के टूटते भरोसे को लौटाना है चुनौती

मेरठ आईएमए को मिली पहली महिला अध्यक्ष

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मेरठ। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) मेरठ में 30 सालों में पहली बार प्रेसीडेंट की कुर्सी महिला को मिली है। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के मेरठ चैप्‍टर की नई कार्यकारणी चुन ली गई। 30 साल में पहली बार डॉ. रेनू भगत के रूप में कोई महिला आइएमए अध्यक्ष बनी है, जबकि सचिव पद पर डा. अनुपमा सिरोही चुनी गईं। उपाध्यक्ष डा. नवनीत अग्रवाल होंगे। सभी नाम निर्विरोध चुने गए हैं।

आईएमए मेरठ की नवनिर्वाचित प्रेसीडेंट डॉ. रेनू भगत अपने सामने सबसे बड़ी चुनौती डॉक्टर्स और समाज के बीच बढ़ते अविश्वास को मानती हैं। डॉ. रेनू कहती हैं मरीज, डॉक्टर एक दूसरे की जरूरत है लेकिन आज जो हालात बन रहे हैं वो गलत हैं। मेरठ में आईएमए की नवनिर्वाचित अध्यक्ष डॉ. रेनू ने दैनिक भास्कर से बातचीत में अनुभवों और चुनौतियों को साझा किया।

डॉ. रेनू कहती हें मैं लकी हूं कि शहर की डॉक्टर्स कम्युनिटी ने मुझे इस पोस्ट के लिए चुना। चुनौतियां हैं मगर सब मिलकर उनको दूर करेंगे। आईएमए डॉक्टर्स की परेशानियों पर बात करने के साथ सोशल इश्यू पर काम करेगा। इसमें एडोलसेंट पर वर्कशाप करने की योजना है। गांवों में सेनिटेशन, हाईजन पर कैम्प, फ्री हेल्थ चैकअप कैम्प, चिकित्सकों के परिवार की महिलाओं के लिए स्वास्थ्य परीक्षण कैम्प, रक्तदान शिविर और कम्युनिटी सर्विस के काम हम लोग करेंगे। स्कूल से गांवों तक जाने की कोशिश रहेगी।

डॉ. रेनू के अनुसार महिलाओं की लीडरशिप को सोसाइटी अभी भी जल्दी स्वीकार नहीं करती। कंपनी, कॉरपोरेट, ऑफिस से लेकर घरों में ये माहौल होता है। पुरुष महिला बॉस, डायरेक्टर को स्वीकार नहीं करते ये चुनौती है। मेडिकल प्रोफेशन इससे थोड़ा अलग है। आईएमए में 1200 डॉक्टर हैं बड़ी संख्या में महिलाएं भी हैं। मेडिकल जागरुकता का क्षेत्र है यहां ऐसी समस्या नहीं होगी।

समाज में डॉक्टर और जनता दोनों के अपने इश्यू हैं। चूंकि आईएमए चिकित्सकों के हितों की रक्षा के लिए काम करने वाला संगठन है इसकी स्थापना का उद्देश्य यही है। इसलिए मैं चिकित्सकों की बात करुंगी। डॉक्टर्स का शोषण न हो, उनके साथ दुर्व्यवहार न किया जाए। चिकित्सकों के हितों के लिए संगठन काम करेगा। लेकिन मरीजों और जनता को भी ध्यान रखूंगी। जनता, डॉक्टर के बीच अविश्वास बढ़ रहा है। कोविड के बाद इसमें इजाफा हुआ है। ज्यादा फीस लेना, गलत चार्ज करना, गलत इलाज इन चीजों पर कभी जनता का शोषण डॉक्टर न करें इसे भी देखूंगी। डॉक्टर, मरीज दोनों को एक दूसरे की जरूरत है दोनों के बीच विश्वास होना जरूरी है।

सरकार चिकित्सकों के सेवानिवृत्ति के नए नियम लागू करने जा रही है। इस पर लगातार चर्चा चल रही है। मेरे हिसाब से एक डॉक्टर कभी रिटायर नहीं होता उसका अनुभव हमेशा जनता के काम आता है। फिर भी डॉक्टरों के रिटायरमेंट की उम्र तय करने की बात है तो इसमें फिटनेस क्राइटेरिया लागू होना चाहिए। 60 साल की आयु के बाद डॉक्टरों का टेस्ट हो जो अनफिट हों वो रिटायर किए जाएं जो चिकित्सक सेवाएं दे सकते हैं उनको रेग्युलर रखा जाए। चिकित्सा महकमे में ऑलरेडी चिकित्सकों की कमी है। रिटायरमेंट होंगे तो डॉक्टरों की कमी हो जाएगी। डॉक्टर जितना पुराना हो उतना अनुभवी और अच्छा माना जाता है। उसके अनुभव से नए चिकित्सक सीख लेते हैं। इसलिए हेल्थ क्राइटेरिया लागू हो।

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