पर्यावरणविद का अनुमान : भविष्य में महाजलप्रलय के आसार

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गोरखपुर : मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के पांचवें दीक्षांत समारोह में राजेंद्र सिंह बतौर मुख्य अतिथि शरीक हुए। इस दौरान उन्होंने उत्तराखंड में आई प्राकतिक आपदा से बने हालातों पर चिंता जाहिर की। उन्होंने कहा कि उनकी चिंता जीवनदायिनी नदियों को सीमा में बांधने पर भी है। वह उत्तराखंड के चमोली जिले में आई तबाही की असली वजह अलकनंदा नदी पर डैम बनाने को मानते हैं।

उन्होंने कहा कि 1992 से हम बराबर कह रहे थे कि अलकनंदा, भगीरथी और मंदाकिनी ये तीनों नदियां पर्यावरण की दृष्टि से महत्वपूर्ण तो हैं ही साथ ही ये तीनों नदियां भूकम्प प्रभावित क्षेत्रों से होकर बहती हैं। तीनों नदियां ग्लेसियर से होकर निकलती हैं और यहां अक्सर बादल फटते की संभावना बनी रहती है। ये प्रकृति का क्रोध है, गुस्सा है, हमें मालूम था कि जल्द ये होगा। ये सरकार को भी मालूम था। इन तीनों छोटी नदियों की प्रकृति को समझ कर उसका सम्मान नहीं करेंगे और मनमर्जी से बांध बनाते जायेंगे तो उसका संकट आपको भुगतना पड़ेगा।

वे कहते हैं कि अगर सरकारें अब भी नहीं चेती तो भविष्य में महाजलप्रलय झेलना पड़ेगा। तबाही का मंजर ऐसा होगा जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की होगी। बता दें कि मैग्सेसे पुरस्कार विजेता राजेंद्र सिंह को पर्यावरणविद व जलपुरुष के नाम से जाने जाता हैं।

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