21 जून से सबको मुफ्त वैक्सीन : पीएम मोदी

पीएम मोदी के देश के नाम संबोधन में बड़ा ऐलान

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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोरोना वायरस की दूसरी लहर के बीच सोमवार शाम 5 बजे राष्ट्र को संबोधित किया। 15 महीने के कोरोना काल में यह उनका 9वां संदेश है। उन्होंने कहा कि भारत कोरोना की लहर के दौरान बहुत बड़ी पीड़ा से गुजरा है। हममे से कई लोगों ने अपनों को खोया है। ऐसे परिवारों के प्रति मेरी संवेदना है। उन्होंने कहा कि कोरोना की दूसरी वेव और इससे हमारी लड़ाई जारी है। दुनिया के अनेक देशों की तरह भारत भी इस लड़ाई के दौरान बड़ी पीड़ा से गुजरा है। बीते 100 साल में आई ये सबसे बड़ी महामारी है, त्रासदी है। इस तरह की महामारी आधुनिक विश्व ने न देखी थी और न अनुभव की थी।
इतनी बड़ी वैश्विक महामारी से हमारा देश कई मोर्चों पर एक साथ लड़ा है। सेकेंड वेव के दौरान अप्रैल और मई के महीने में भारत में मेडिकल ऑक्सीजन की डिमांड अकल्पनीय रूप से बढ़ गई थी। भारत के इतिहास में कभी भी इतनी मात्रा में मेडिकल ऑक्सीजन की जरूरत महसूस नहीं की गई। इस जरूरत को पूरा करने के लिए युद्धस्तर पर काम किया गया। सरकार के सभी तंत्र लगे। देश में अब तक 23 करोड़ से ज्यादा वैक्सीन की डोज़ दी जा चुकी है। आने वाले दिनों में कोरोना वैक्सीन की सप्लाई बढ़ने वाली है। देश में 7 विभिन्न कंपनियां वैक्सीन का उत्पादन कर रही हैं। अन्य 3 वैक्सीन का ट्रायल भी चल रहा है। बच्चों के लिए भी दो वैक्सीन का ट्रायल चल रहा है। कोरोना से लडाई में वैक्सीन हमारे लिए सुरक्षा कवच की तरह है। आज अगर हमारे पास वैक्सीन नहीं होती तो भारत जैसे विशाल देश की क्या स्थिति होती? कई दशक पहले भारत को विदेशों से वैक्सीन लेने के लिए दशकों लग जाते थे। आज भारत ने एक साल के अंदर मेड इन इंडिया वैक्सीन लांच कर दी। जो लोग भी वैक्सीन को लेकर आशंका पैदा कर रहे हैं, अफवाहें फैला रहे हैं, वो भोले-भाले भाई-बहनों के जीवन के साथ बहुत बड़ा खिलवाड़ कर रहे हैं। ऐसी अफवाहों से सतर्क रहने की जरूरत है।

राज्य सरकार को वैक्सीन पर कुछ भी खर्च नहीं करना होगा
पीएम मोदी ने कहा कि ये निर्णय लिया गया है कि राज्यों के पास वैक्सीनेशन से जुड़ा जो 25 प्रतिशत काम था, उसकी जिम्मेदारी भी भारत सरकार उठाएगी। ये व्यवस्था आने वाले 2 सप्ताह में लागू की जाएगी। इन दो सप्ताह में केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर नई गाइडलाइंस के अनुसार आवश्यक तैयारी कर लेंगी। 21 जून, सोमवार (अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस) से देश के हर राज्य में, 18 वर्ष से ऊपर की उम्र के सभी नागरिकों के लिए, भारत सरकार राज्यों को मुफ्त वैक्सीन मुहैया कराएगी।
वैक्सीन निर्माताओं से कुल वैक्सीन उत्पादन का 75 प्रतिशत हिस्सा भारत सरकार खुद ही खरीदकर राज्य सरकारों को मुफ्त देगी। देश की किसी भी राज्य सरकार को वैक्सीन पर कुछ भी खर्च नहीं करना होगा। अब तक देश के करोड़ों लोगों को मुफ्त वैक्सीन मिली है। अब 18 वर्ष की आयु के लोग भी इसमें जुड़ जाएंगे। सभी देशवासियों के लिए भारत सरकार ही मुफ्त वैक्सीन उपलब्ध करवाएगी। देश में बन रही वैक्सीन में से 25 प्रतिशत,  प्राइवेट सेक्टर के अस्पताल सीधे ले पाएं, ये व्यवस्था जारी रहेगी। प्राइवेट अस्पताल, वैक्सीन की निर्धारित कीमत के उपरांत एक डोज पर अधिकतम 150 रुपए ही सर्विस चार्ज ले सकेंगे। इसकी निगरानी करने का काम राज्य सरकारों के ही पास रहेगा।

प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना को दीपावली तक बढ़ी
पीएम मोदी ने कहा कि सरकार ने फैसला लिया है कि प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना को अब दीपावली तक आगे बढ़ाया जाएगा। महामारी के इस समय में, सरकार गरीब की हर जरूरत के साथ, उसका साथी बनकर खड़ी है। यानि नवंबर तक 80 करोड़ से अधिक देशवासियों को, हर महीने तय मात्रा में मुफ्त अनाज उपलब्ध होगा। पीएम मोदी ने कहा कि आज पूरे विश्व में वैक्सीन के लिए जो मांग है, उसकी तुलना में उत्पादन करने वाले देश और वैक्सीन बनाने वाली कंपनियां बहुत कम हैं। कल्पना करिए कि अभी हमारे पास भारत में बनी वैक्सीन नहीं होती तो आज भारत जैसे विशाल देश में क्या होता? आप पिछले 50-60 साल का इतिहास देखेंगे तो पता चलेगा कि भारत को विदेशों से वैक्सीन प्राप्त करने में दशकों लग जाते थे। विदेशों में वैक्सीन का काम पूरा हो जाता था तब भी हमारे देश में वैक्सीनेशन का काम शुरू नहीं हो पाता था।

दो मेड इन इंडिया वैक्सीन लॉन्च की
पीएम मोदी ने कहा कि हर आशंका को दरकिनार करके भारत ने 1 साल के भीतर ही एक नहीं बल्कि दो मेड इन इंडिया वैक्सीन्स लॉन्च कर दी। हमारे देश ने, वैज्ञानिकों ने ये दिखा दिया कि भारत बड़े-बड़े देशों से पीछे नहीं है। आज जब मैं आपसे बात कर रहा हूं तो देश में 23 करोड़ से ज्यादा वैक्सीन की डोज दी जा चुकी है। पिछले काफी समय से देश लगातार जो प्रयास और परिश्रम कर रहा है, उससे आने वाले दिनों में वैक्सीन की सप्लाई और भी ज्यादा बढ़ने वाली है।
आज देश में 7 कंपनियां, विभिन्न प्रकार की वैक्सीन्स का प्रॉडक्शन कर रही हैं। तीन और वैक्सीन्स का ट्रायल भी एडवांस स्टेज में चल रहा है। पीएम मोदी ने कहा कि देश में कम होते कोरोना के मामलों के बीच, केंद्र सरकार के सामने अलग-अलग सुझाव भी आने लगे, भिन्न-भिन्न मांगे होने लगीं। पूछा जाने लगा, सब कुछ भारत सरकार ही क्यों तय कर रही है? राज्य सरकारों को छूट क्यों नहीं दी जा रही? राज्य सरकारों को लॉकडाउन की छूट क्यों नहीं मिल रही? वन साइज डस नॉट फिल ऑल जैसी बातें भी कही गईं।

वैक्सीनेशन पर तरह-तरह के स्वर उठे
पीएम मोदी ने कहा कि इस साल 16 जनवरी से शुरू होकर अप्रैल महीने के अंत तक, भारत का वैक्सीनेशन कार्यक्रम मुख्यत: केंद्र सरकार की देखरेख में ही चला। सभी को मुफ्त वैक्सीन लगाने के मार्ग पर देश आगे बढ़ रहा था। देश के नागरिक भी, अनुशासन का पालन करते हुए, अपनी बारी आने पर वैक्सीन लगवा रहे थे। इस बीच, कई राज्य सरकारों ने फिर कहा कि वैक्सीन का काम डी-सेंट्रलाइज किया जाए और राज्यों पर छोड़ दिया जाए। तरह-तरह के स्वर उठे। जैसे कि वैक्सीनेशन के लिए एज ग्रुप क्यों बनाए गए? दूसरी तरफ किसी ने कहा कि उम्र की सीमा आखिर केंद्र सरकार ही क्यों तय करे? कुछ आवाजें तो ऐसी भी उठीं कि बुजुर्गों का वैक्सीनेशन पहले क्यों हो रहा है? भांति-भांति के दबाव भी बनाए गए, देश के मीडिया के एक वर्ग ने इसे कैंपेन के रूप में भी चलाया।

पीएम ने किया नेजल स्प्रे का जिक्र
पीएम मोदी ने कहा कि वैक्सीन की उपलब्धता बढ़ाने के लिए दूसरे देशों की कंपनियों से वैक्सीन खरीदने की प्रक्रिया को तेज किया गया है। हमारे एक्सपर्ट्स द्वारा बच्चों को कोरोना होने की चिंता जताई गई है। इस दिशा में दो वैक्सीन का ट्रायल चल रहा है। नेजल वैक्सीन पर भी काम चल रहा है। अगर इस दिशा में सफलता मिलती है तो यह बहुत बड़ी उपलब्धि होगी। सोचिए कोरोना की दूसरी लहर से पहले अगर हमारे हेल्थ-फ्रंटलाइन वर्कर्स को वैक्सीन न लगी होती तो क्या होता। इसी वजह से वे लोग ज्यादा से ज्यादा लोगों की जिंदगी बचा पाए।

भारत किसी से पीछे नहीं
पीएम मोदी ने कहा कि हमारे देश के वैज्ञानिकों ने ये दिखा दिया कि भारत बड़े-बड़े देशों से पीछे नहीं है। आज जब बात कर रहा हूं तो देश में 23 करोड़ से ज्यादा वैक्सीन डोज दी जा चुकी है। हमारे यहां कहा जाता है कि विश्वासेन सिद्धि यानी हमारे प्रयासों से सफलता तब मिलती है जब हमें स्वयं पर विश्वास होता है। हमें पूरा विश्वास था कि हमारे वैज्ञानिक बहुत ही कम समय में वैक्सीन बनाने में सफलता हासिल कर लेंगे। इसी विश्वास के चलते जब हमारे वैज्ञानिक अपना रिसर्च वर्क कर रहे थे, तभी हमने तैयारियां कर ली थीं।

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