कुंभ में फर्जी कोरोना टेस्टिंग पर मैं इसकी न्यायिक जांच चाहता था : पूर्व सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत

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नई दिल्ली। हरिद्वार महाकुंभ के दौरान किए गए कोरोना टेस्ट (एंटीजन टेस्ट) में हुए घोटाले की जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन कर दिया गया है। एसआईटी ने जांच शुरू करते हुए पहले दिन हरिद्वार के सीएमओ डॉ.एसके झा से एक घंटे तक पूछताछ की। हरिद्वार के एसएसपी सेंथिल अबुदई कृष्णराज एस ने कोरोना टेस्ट घपले की जांच के लिए शुक्रवार को एसआईटी गठित कर दी। बीते गुरुवार को कोरोना जांच में घोटाले के आरोप में शहर कोतवाली में मैक्स कॉरपोरेट सर्विस, नालवा लैबोरेट्रीज व दिल्ली की डॉ. लालचंदानी लैब के खिलाफ केस दर्ज किया गया था। एसएसपी ने बताया-यह एसआईटी, एसपी सिटी कमलेश उपाध्याय के सुपरविजन में काम करेगी। टीम ने जांच शुरू भी कर दी है।एसआईटी ने शुक्रवार को हरिद्वार के सीएमओ डॉ.एसके झा से एक घंटे पूछताछ की। उनके बयान भी दर्ज किए गए। पुलिस सूत्रों की मानें तो घोटाले को लेकर स्वास्थ्य विभाग से जुड़े कई ऐसे सवाल सीएमओ से पूछे गए है, जिनके जवाब अभी तक किसी के पास नहीं है।
कुंभ में फर्जी कोरोना टेस्टिंग पर उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि मुख्यमंत्री ने इस पर एसआईटी का गठन किया है। हालांकि, मैं इसकी न्यायिक जांच चाहता था। ये अंतरराज्यीय मामला है और क्योंकि एसआईटी में छोटी श्रेणी के अफसर हैं इसलिए लोग ये शक कर सकते हैं कि जांच सही होगी या नहीं। त्रिवेंद्र सिंह रावत को चार महीने पहले उत्तराखंड के मुख्यमंत्री की कुर्सी से हटा दिया गया था और उनकी जगह पर तीरथ सिंह रावत को बैठाया गया था। तब से इन दोनों नेताओं के बीच तल्खियां बरकरार हैं। त्रिवेंद्र सिंह रावत ने अपने ताज़ा बयान में कहा है कि इस मामले की जांच हाई कोर्ट के किसी वर्तमान जज से कराई जानी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि कोरोना की फर्जी रिपोर्ट बनाने के आरोपों की जांच होनी चाहिए और जो लोग इसमें शामिल रहे हैं, उनके खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज होना चाहिए। इससे पहले त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा था कि यह लापरवाही नहीं बल्कि गंभीर अपराध है और इसे जानबूझकर किया गया है। उन्होंने कहा था कि इस मामले में निष्पक्ष कार्रवाई होनी चाहिए।
त्रिवेंद्र के बयान के बाद मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत सामने आए थे और उन्होंने अपना बचाव किया था। तीरथ सिंह रावत ने कहा था कि यह उनके कुर्सी संभालने से पहले का मामला है और उन्होंने इस मामले में जांच बिठाई है। उन्होंने कहा था कि वह चाहते हैं कि दूध का दूध और पानी का पानी हो जाए और जो भी इस मामले में दोषी पाया जाएगा उसके खिलाफ सख़्त कार्रवाई की जाएगी। तीरथ सिंह रावत ने सीधे तौर पर इस फर्जीवाड़े के लिए पूर्ववर्ती त्रिवेंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहराने की कोशिश की थी।

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