भाजपा की तारीफों का पुल बांध जितिन ने कांग्रेस को दिया बड़ा झटका

यूपी विधानसभा चुनाव से पहले जितिन प्रसाद बीजेपी में शामिल

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नई दिल्ली। राहुल गांधी के करीबी, पूर्व केंद्रीय मंत्री और दिग्गज कांग्रेस नेता जितिन प्रसाद बुधवार को कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में शामिल हो गए। ज्योतिरादित्य सिंधिया के बाद जहां कांग्रेस को एक और बड़ा झटका लगा है, वहीं बीजेपी के लिए जितिन कितने फायदेमंद साबित होने वाले हैं, इस पर भी चर्चा शुरू हो गई है। जितिन के जरिए बीजेपी की कोशिश यूपी में ब्राह्मणों की नाराजगी दूर करने की होगी, साथ ही उन्हें यूपी बीजेपी में बड़ी भूमिका भी मिल सकती है।
दिल्ली स्थित बीजेपी मुख्यालय में केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने जितिन प्रसाद को पार्टी की सदस्यता दिलाई। इससे पहले जितिन प्रसाद ने गृहमंत्री अमित शाह से उनके आवास पर मुलाकात भी की। पार्टी की सदस्यता लेने के बाद जितिन ने कांग्रेस पर तंज कसा। कहा, अब केवल बीजेपी ही देशहित में काम करने वाली पार्टी है। बाकी दल व्यक्ति विशेष और क्षेत्र के हो गए हैं। राष्ट्रीय दल के नाम पर देश में अगर कोई पार्टी है तो वह सिर्फ बीजेपी है। बीजेपी में शामिल होने के बाद जितिन प्रसाद ने बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा से मुलाकात की। इस दौरान उनके साथ केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल भी मौजूद रहे।
वहीं, यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि कांग्रेस छोड़कर बीजेपी के वृहद परिवार में शामिल होने पर जितिन प्रसाद का स्वागत है। जितिन प्रसाद के भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने से उत्तर प्रदेश में पार्टी को अवश्य मजबूती मिलेगी।
बता दें कि कुंवर जितिन प्रसाद उत्तर प्रदेश के शाही परिवार से ताल्लुक रखने वाले कांग्रेस के वो युवा चेहरे हैं, जिन्होंने दो बार लोकसभा चुनाव जीत कर मनमोहन सिंह की कैबिनेट में मानव संसाधन विकास मंत्रालय और पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालय में राज्यमंत्री का दायित्व संभाला। ऐसे में जितिन प्रसाद के बीजेपी में जाने पर कांग्रेस को बड़ा झटका लगना तय माना जा रहा है।

क्या बोले जितिन प्रसाद ?
बीजेपी में शामिल होने के बाद जितिन प्रसाद ने कहा कि मैं बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह और सभी बीजेपी नेताओं का धन्यवाद देता हूं। ये राजनीतिक जीवन का नया अध्याय शुरू हो रहा है। मेरा कांग्रेस पार्टी से 3 पीढ़ियों का साथ रहा है। मैंने ये महत्वपूर्ण निर्णय बहुत सोच, विचार और मंथन के बाद लिया है। आज सवाल ये नहीं है कि मैं किस पार्टी को छोड़कर आ रहा हूं बल्कि सवाल ये है कि मैं किस पार्टी में जा रहा हूं और क्यों जा रहा हूं। मैंने पिछले 8-10 सालों में ये महसूस किया है कि आज देश में अगर कोई असली मायने में संस्थागत राजनीतिक दल है तो बीजेपी है। बाकी दल तो व्यक्ति विशेष और क्षेत्र के हो गए मगर राष्ट्रीय दल के नाम पर भारत में कोई दल है तो बीजेपी है। आज देश जिस स्थिति से गुजर रहा है, अगर कोई राजनीतिक दल या नेता देश के हित के लिए खड़ा है, तो वह भाजपा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हैं।

क्या बोले पीयूष गोयल ?
केंद्रीय रेल मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि आज जितिन प्रसाद हमारे बीच में है। ये उत्तर प्रदेश के नेता हैं। भाजपा की नीति और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से प्रभावित होकर हमारी पार्टी में आ रहे हैं। ये कांग्रेस संगठन में कई पदों पर काम कर चुके हैं। मंत्री भी रहे हैं।

पीयूष गोयल ने कहा- जितिन प्रसाद ने बहुत छोटी आयु से उत्तर प्रदेश की सेवा में अपना पूरा जीवन झोंक दिया है। अभी भी मुझे याद है कि इनकी उम्र 27 वर्ष की थी, जब अचानक इनके पिता जी का देहांत हो गया था। तब ये मुंबई में काम करते थे। दिल्ली के श्रीराम कॉलेज से ये पढ़ाई कर चुके हैं। छोटी ही उम्र में परिवार को झटका लगा। इन्होंने छोटी आयु में भी उत्तरप्रदेश में दौरा किया। अलग-अलग जिलों में जाकर अपनी प्रतिभा और काम से लोगों का दिल जीता। शाहजहांपुर से सांसद बने। इन्होंने उत्तर प्रदेश की राजनीति में जो भूमिका निभाई, वो हम सबने देखी है।

जितिन प्रसाद मेरे छोटे भाई जैसे हैं : सिंधिया
एक साल पहले बीजेपी में शामिल हुए ज्योतिरादित्य सिंधिया ने जितिन प्रसाद के फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने कहा है कि वह हमारे छोटे भाई जैसे हैं। भोपाल पहुंचे ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि वह मेरे छोटे भाई जैसे हैं और मैं उनका बीजेपी में स्वागत करता हूं। मैं उन्हें बधाई देता हूं। उसके बाद सिंधिया आगे बढ़ गए। दरअसल, कांग्रेस में रहते हुए राहुल ब्रिगेड में ज्योतिरादित्य सिंधिया, सचिन पायलट और जितिन प्रसाद की खूब चर्चा होती थी। ज्योतिरादित्य सिंधिया के बाद जितिन प्रसाद ने भी कांग्रेस छोड़ दिया है। वहीं, सचिन पायलट भी नाराज चल रहे हैं। गौरतलब है कि ज्योतिरादित्य सिंधिया मार्च 2020 में कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया था। उनके साथ एमपी कांग्रेस 22 विधायकों ने भी इस्तीफा दिया था, इसके बाद एमपी में कमलनाथ की सरकार गिर गई थी। बीजेपी में शामिल होने के बाद पार्टी ने ज्योतिरादित्य सिंधिया को राज्यसभा भेज दिया।

उनका जाना अच्छा नहीं : खड़गे
जितिन प्रसाद के कांग्रेस छोड़ बीजेपी में शामिल होने पर कांग्रेस सांसद मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि बीजेपी में शामिल होना जितिन प्रसाद की मर्जी है, उनका भविष्य यहां (कांग्रेस) में था। लेकिन उनका जाना अच्छा नहीं क्योंकि उनके पिता जी भी कांग्रेस में पहले से थे फिर भी उन्होंन ऐसा निर्णय लिया..ये दुर्भाग्य है।

कांग्रेस के लिए बड़ा झटका
कांग्रेस नेता कुलदीप बिश्नोई ने पूर्व केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद के बीजेपी में शामिल होने को कांग्रेस के लिए बड़ा झटका करार देते हुए बुधवार को कहा कि उनकी पार्टी को राज्यों में जीत हासिल करने के लिए जन नेताओं की पहचान कर उन्हें मजबूती प्रदान करनी चाहिए।
हरियाणा प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ नेता बिश्नोई ने ट्वीट किया कि पहले ज्योतिरादित्य सिंधिया … और अब जितिन प्रसाद …। कांग्रेस के लिए यह बड़ा झटका है क्योंकि हम उन नेताओं को खो रहे हैं जिन्होंने पार्टी को दिया और आगे भी दे सकते थे।
उन्होंने यह भी कहा कि इससे मैं सहमत हूं कि उन्हें कांग्रेस को, खासकर इस मुश्किल समय में नहीं छोड़ना चाहिए था। परंतु कांग्रेस को जन नेताओं की पहचान करके उन्हें मजबूत करना चाहिए ताकि राज्यों में फिर से जीत हासिल की जा सके।

कांग्रेस छोड़ने की वजह !
जितिन प्रसाद कांग्रेस के दिग्‍गज नेताओं में शामिल हैं। एक समय पर वह कांग्रेस की टीम का अहम हिस्‍सा हुआ करते थे, लेकिन बताया जा रहा है कि कांग्रेस के बड़े ब्राह्मण चेहरों में से एक जितिन प्रसाद पिछले कई दिनों से पार्टी हाईकमान से नाराज थे। वह यूपी कांग्रेस के कुछ नेताओं से अपनी नाराजगी जाहिर भी कर चुके थे। हालांकि, इसके बावजूद जितिन प्रसाद की शिकायत को पार्टी हाईकमान ने नजरअंदाज किया। यही वजह है कि उन्होंने कांग्रेस का हाथ छोड़ बीजेपी का दामन थाम लिया है।

दरअसल, उत्तर प्रदेश कांग्रेस में जब से प्रियंका गांधी की एंट्री हुई है, तब से जितिन प्रसाद की अहमियत पार्टी की नजरों कम होती नजर आने लगी। प्रियंका के आने के बाद यूपी प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार उर्फ लल्लू बनाए गए। कई अहम समितियों में भी जितिन प्रसाद का नाम नदारद रहा। इसके बाद जितिन प्रसाद को पश्चिम बंगाल का चुनाव प्रभारी बना दिया था। जितिन प्रसाद के लिए ये संकेत काफी था। उन्हें उत्तर प्रदेश की राजनीति से दूर करने का प्रयास किया जा रहा था।

किसे फायदा, किसे नुकसान ?
राजनीतिक विश्लेषक कहते हैं कि जितिन का आना बीजेपी के लिए फायदे का उतना बड़ा सौदा नहीं है जितना कांग्रेस के लिए नुकसान है। बीजेपी को कितना फायदा होगा यह तो समय बताएगा। जितिन न ही 2014 में जीते थे और न ही 2019 में। हां वह जिस क्षेत्र से आते हैं वहां जरूर चुनाव को कुछ फायदा हो सकता है। इसके अलावा बीजेपी को ब्राह्मणों की नाराजगी दूर करने के लिए बड़ा चेहरा जरूर मिल गया है। जितिन को अगले साल विधानसभा चुनाव में टिकट मिल सकता है और अगर फिर बीजेपी की सरकार बनती है तो इन्हें कैबिनेट में जगह मिल सकती है। इसके अलावा बीजेपी इनके चेहरे का उपयोग करेगी, चुनाव प्रचार में भी इन्हें लगा सकती है। इनके सभी समर्थक भी बीजेपी के साथ जुड़ जाएंगे।

बीजेपी यूपी में अपना सोशल इंजीनियरिंग गठबंधन को बढ़ाने में लगी है और जितिन के रूप में एक तरह से ब्राह्मणों की नाराजगी दूर करने का अवसर मिला है। योगी सरकार पर ब्राह्मणों की अनदेखी के जो आरोप लग रहे थे उसे काउंटर करने की कोशिश भी है। बीजेपी से जुड़ने से पहले पिछले साल जितिन प्रसाद ने ब्राह्मण चेतना परिषद नाम से संगठन बनाया था। जितिन ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए जिले वार ब्राह्मण समाज के लोगों से संवाद किया और ब्राह्मण परिवारों से मुलाकात भी की थी। यूपी की राजनीति में देखा जाए तो ब्राह्मणों समुदाय का वर्चस्व हमेशा रहा है। यूपी में लगभग 12 फीसदी ब्राह्मण वोट बैंक है। कई विधानसभा सीटों पर ब्राह्मणों की आबादी 20 फीसदी से भी अधिक बताई जाती है। लिहाजा जीत-हार में उनकी भूमिका अहम रहती है।

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