कांवड़ यात्रा पर सरकार को सुप्रीम नोटिस

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-25 जुलाई से 6 अगस्त के बीच प्रस्तावित है कांवड़ यात्रा
-उत्तर प्रदेश सरकार ने दी हरी झंडी, कुछ पाबंदियां लगाई
-सुप्रीम कोर्ट ने अखबार में छपी खबर का स्‍वत: संज्ञान लिया
-यूपी, उत्तराखंड और केंद्र की सरकार को थमाया नोटिस

ब्यूरो (विद्रोही आनन्द)
नई दिल्ली/लखनऊ। कोरोना महामारी की संभावित तीसरी लहर के बीच कांवड़ यात्रा की अनुमति देने के उत्तर प्रदेश सरकार के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने स्वत संज्ञान लिया है। जस्टिस रोहिंटन एफ नरीमन की अध्यक्षता वाली बेंच ने केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार को नोटिस जारी किया है। कोर्ट अब इस मामले की 16 जुलाई यानी शुक्रवार को सुनवाई करेगा। कांवड़ यात्रा 25 जुलाई से शुरू होने वाली है। इसमें उत्तरी राज्यों से शिव भक्त अपने क्षेत्रों के शिव मंदिरों में चढ़ाने के लिए उत्तराखंड के हरिद्वार में गंगा नदी से जल इकट्ठा करने के लिए पैदल या अन्य साधनों से यात्रा करते हैं। उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री जय प्रताप सिंह ने कहा कि कांवड़ संगठनों से बात कर कांवड़ यात्रा से जुड़ी तैयारियां हो गई हैं। हर साल की तरह इस साल भी 25 तारीख से प्रदेश में कांवड़ यात्रा शुरू होगी। हम सुनिश्चित करेंगे कि कोविड़ नियमों का पालन हो और लोगों की आस्था का भी ध्यान रखा जाएं।

जस्टिस नरीमन ने सुनवाई के दौरान कहा कि हमने परेशान करने वाली खबर पढ़ी है कि यूपी सरकार कांवड़ यात्रा को मंजूरी दे रही है, जबकि उत्तराखंड सरकार ने इस पर रोक लगाई है। बेंच ने कहा कि 25 जुलाई से कांवड़ यात्रा की शुरूआत होनी है। ऐसे में इस अहम मुद्दे पर जल्द सुनवाई जरूरी है। बेंच ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोरोना से निपटने के लिए सख्ती बरतने की जरूरत बताई है।

बता दें कि पड़ोसी राज्य उत्तराखंड ने मंगलवार को महामारी के जोखिम का हवाला देते हुए कांवड़ यात्रा आयोजित नहीं करने का फैसला लिया। हालांकि, उत्तर प्रदेश ने कुछ प्रतिबंधों के साथ कांवड़ यात्रा की अनुमति देने का फैसला लिया है। उत्तराखंड सरकार ने प्रदेश में कोरोना के डेल्टा प्लस वेरियंट की पुष्टि होने और संक्रमण की तीसरी लहर की आशंका के मद्देनजर कांवड़ यात्रा को स्थगित करने का निर्णय लिया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि हरिद्वार को कोरोना महामारी का केंद्र नहीं बनाया जा सकता।

कांवड़ यात्रा 25 जुलाई से 6 अगस्त तक आयोजित करने का प्रस्ताव है। पिछली बार साल 2019 में यात्रा का आयोजन किया गया था। लगभग 3.5 करोड़ भक्त (कांवरियों) हरिद्वार गए थे, जबकि 2-3 करोड़ से अधिक लोगों ने पश्चिमी यूपी के तीर्थ स्थलों पर गए थे।

इससे पहले केंद्रीय पर्यटन मंत्री जी किशन रेड्डी ने उत्तराखंड सरकार के इस साल कांवड़ यात्रा रद्द करने का निर्णय का स्वागत करते हुए लोगों से कोरोना वायरस की गंभीरता को समझने की अपील की। एएनआई से बात करते हुए, रेड्डी ने कहा कि कोविड -19 की स्थिति को देखते हुए, पहले अमरनाथ यात्रा और अब कांवड़ यात्रा रद्द कर दी गई है। लोगों को स्थिति की गंभीरता को समझना चाहिए। लोगों के जीवन को बचाने की जिम्मेदारी हमारी है।

हम थोड़ा सा भी समझौता नहीं कर सकते
न्यायमूर्ति नरीमन ने एसजी तुषार मेहता से कहा कि, हमने अखबार में कुछ परेशान करने वाला पढ़ा कि यूपी राज्य ने कांवड़ यात्रा आयोजित करने का फैसला किया है, जबकि उत्तराखंड राज्य ने अपने अनुभव के आधार पर फैसला किया कि कोई यात्रा आयोजित नहीं की जाएगी। हम जानना चाहते हैं कि संबंधित सरकारों का क्या स्टैंड है। भारत के नागरिक पूरी तरह से हैरान हैं, वे नहीं जानते कि क्या हो रहा है और जब प्रधानमंत्री से देश में कोविड-19 की तीसरी लहर के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि हम थोड़ा सा भी समझौता नहीं कर सकते। हम केंद्र, यूपी राज्य और उत्तराखंड राज्य को नोटिस जारी कर रहे हैं और क्योंकि कांवड़ यात्रा 25 जुलाई से निकलने वाली है। हम चाहते हैं कि वे जल्द से जल्द जवाब दाखिल करें ताकि मामले की सुनवाई शुक्रवार को हो सके। शुक्रवार की सुबह प्रमुख सचिव, उत्तराखंड राज्य, गृह सचिव, भारत संघ और प्रमुख सचिव, यूपी राज्य द्वारा हलफनामा दायर किया जाएगा।

आईएमए ने की थी कांवड़ यात्रा रद्द करने की मांग
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने उत्तराखंड सरकार से इस साल कांवड़ यात्रा न करने का आग्रह किया था। उत्तराखंड में आईएमए के राज्य सचिव डॉ अजय खन्ना से वार्षिक तीर्थयात्रा के लिए इकट्ठा होने वाली भीड़ के बारे में चिंता व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री धामी से आग्रह किया था कि वे बाहर से भक्तों को यात्रा के लिए राज्य में प्रवेश न करने दें। हालांकि, इसमें कहा गया है कि यदि आवश्यक हो तो तीर्थयात्रियों के लिए कोरोना की नेगेटिव आरटी-पीसीआर रिपोर्ट अनिवार्य की जा सकती है।

पीएम मोदी ने कोविड पर क्या कहा था?
मैं बहुत जोर देकर कहूंगा हिल स्टेशन में, मार्केट में, बिना मास्क पहने, बिना प्रोटोकॉल का अमल किए बिना भारी भीड़ का उमड़ना… मैं समझता हूं यह चिंता का विषय है, यह ठीक नहीं है। कई बार हम यह तर्क सुनते हैं और कुछ लोग सीना तानकर बोलते हैं- अरे भाई, तीसरी लहर आने से पहले हम एंजॉय करना चाहते हैं। यह बात लोगों को समझाना जरूरी है कि तीसरी लहर अपने आप नहीं आएगी।
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