सुप्रीम कोर्ट ने किसानों से कहा- आपने पूरे शहर का दम घोंट दिया

किसान संगठनों को 'सुप्रीम' फटकार

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सुप्रीम कोर्ट ने किसान महापंचायत को सुनाई खरी-खरी
जंतर-मंतर पर सत्याग्रह की अनुमति मांगी तो कोर्ट ने लगाई फटकार
कृषि कानूनों के विरोध में कई महीनों से धरने पर हैं किसान
सुप्रीम कोर्ट ने कहा- आपने पूरे शहर का गला घोंट दिया
सुप्रीम कोर्ट ने कहा- आम लोगों को भी आवाजाही का हक है
राकेश टिकैत बोले- हाईवे हमने नहीं पुलिस ने ब्लॉक कर रखा है

नई दिल्ली। केंद्र सरकार द्वारा बनाए गए तीन नए कृषि कानूनों के विरोध में दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने की इजाजत मांग रहे किसान संगठनों को सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को फटकार लगाई। सुप्रीम कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कि आपने पूरे दिल्ली शहर का दम घोंट दिया है। हाईवे जाम कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने किसान समूह से पूछा कि एक बार जब किसान समूह पहले ही विवादास्पद कृषि कानूनों को चुनौती देने के लिए अदालतों का दरवाजा खटखटा चुके हैं, तो कानूनों के खिलाफ विरोध जारी रखने का क्या मतलब है।
न्यायमूर्ति एएम खानविलकर की अगुवाई वाली पीठ ने यह सवाल मौखिक रूप से किसान समूह किसान महापंचायत से किया, जिसने राष्ट्रीय राजधानी में जंतर-मंतर पर सत्याग्रह करने की अनुमति के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया है।
न्यायमूर्ति खानविलकर ने कहा, सत्याग्रह करने का क्या मतलब है। आपने अदालत का दरवाजा खटखटाया है। अदालत पर भरोसा रखें। एक बार जब आप अदालत का दरवाजा खटखटा चुके हैं, तो विरोध का क्या मतलब है? क्या आप न्यायिक प्रणाली का विरोध कर रहे हैं? व्यवस्था में विश्वास रखें। जज ने विरोध प्रदर्शन के तहत दिल्ली-एनसीआर सीमा पर प्रदर्शन कर रहे किसानों द्वारा की गई सड़क नाकेबंदी के खिलाफ भी आलोचनात्मक टिप्पणी की।
न्यायमूर्ति एएम खानविलकर ने कहा कि आपने पूरे शहर का गला घोंट दिया है, अब आप शहर के अंदर आना चाहते हैं, आसपास के निवासी, क्या वे विरोध से खुश हैं? यह बंद होना चाहिए। आप सुरक्षा और रक्षा कर्मियों को बाधित कर रहे हैं। यह मीडिया में था। यह सब रोका जाना चाहिए। एक बार जब आप अदालत में कानूनों को चुनौती देने आते हैं तो विरोध करने का कोई मतलब नहीं है। विरोध-प्रदर्शन का सबको अधिकार है, लेकिन नेशनल हाईवे ब्लॉक होने के चलते लोगों को परेशानी में नहीं डाला जा सकता है।
याचिकाकर्ता के वकील अजय चौधरी ने प्रस्तुत किया कि किसान महापंचायत प्रदर्शनकारियों के समूह का हिस्सा नहीं है, जिन्होंने दिल्ली-एनसीआर में सड़क-नाकाबंदी का आयोजन किया है। उन्होंने आगे कहा कि सड़कों को पुलिस ने अवरुद्ध किया था न कि किसानों ने।
पीठ, जिसमें न्यायमूर्ति सीटी रविकुमार भी शामिल हैं, ने वकील से इस आशय का एक हलफनामा दायर करने के लिए कहा कि याचिकाकर्ता सड़क नाकाबंदी का हिस्सा नहीं है।
पीठ ने वकील से भारत के महान्यायवादी को याचिका की अग्रिम प्रति देने को कहा और मामले को अगले सोमवार को सुनवाई के लिए पोस्ट कर दिया। संबंधित टिप्पणी में, न्यायमूर्ति संजय किशन कौल के नेतृत्व में सुप्रीम कोर्ट की एक अन्य पीठ ने गुरुवार को दिल्ली-एनसीआर सीमाओं में किसानों के विरोध में आयोजित सड़क नाकाबंदी के खिलाफ मौखिक टिप्पणी की थी।
पीठ ने मौखिक रूप से टिप्पणी की कि राजमार्गों को हमेशा के लिए अवरुद्ध नहीं किया जा सकता है और शिकायतों का निवारण न्यायिक मंच या संसदीय बहस के माध्यम से किया जाना चाहिए।
बता दें कि किसान समूह किसान महापंचायत ने केंद्र सरकार के तहत उपराज्यपाल और आयुक्त दिल्ली पुलिस (प्रतिवादियों) को निर्देश जारी करने के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और मांग की कि महापंचायत को जंतर मंतर पर सत्याग्रह करने की अनुमति दी जाए जैसा कि संयुक्त किसान मोर्चा को अनुमति दी गई है। अब मामले की अगली सुनवाई सोमवार को होगी।

क्या बोले राकेश टिकैत ?
वहीं, किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा है कि हाईवे हमने नहीं पुलिस ने ब्लॉक कर रखा है। सिंघु बॉर्डर पर भी अंदर तक गाड़ियां चल रही हैं। आगे के बॉर्डर हटा दें तो गाड़ियां आगे निकल जाएंगी। हमें भी परेशानी है। वो रोक देंगे तो हम आगे दिल्ली चले जाएंगे। हम चाहते हैं सरकार हमसे बात करके इसका समाधान करे।

अगस्त में कोर्ट ने कहा था- सरकार समाधान निकाले
सुप्रीम कोर्ट ने अगस्त में सरकार से समाधान तलाशने को कहा था सुप्रीम कोर्ट ने 23 अगस्त को भी कहा था कि किसानों को प्रदर्शन का अधिकार है, लेकिन सड़कें अनिश्चितकाल के लिए बंद नहीं कर सकते। कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकारों से इस समस्या का हल खोजने के लिए भी कहा था। कोर्ट ने सरकारों से कहा था कि कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों का जो प्रदर्शन हो रहा है उससे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में लोगों को आवाजाही में हो रही परेशानी का समाधान करें।

पहले शाहीन बाग, अब किसान आंदोलन
पिछले साल सुप्रीम कोर्ट ने शाहीन बाग में पब्लिक रोड पर हुए प्रदर्शन के मामले में कहा था कि पब्लिक प्लेस और रोड को अनिश्चितकाल के लिए ब्लॉक नहीं किया जा सकता। प्रशासन की ड्यूटी है कि वह ऐसी जगह को खाली कराए। इस तरह से प्रदर्शन के लिए पब्लिक रोड को कब्जा करने के मामले में प्रशासन एक्शन ले और कोर्ट का इंतजार न करे। अब सुप्रीम कोर्ट ने किसान आंदोलन को लेकर सख्त टिप्पणी की है।

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