Friday , October 7 2022
अयोध्या : CM योगी ने रखा राम मंदिर के गर्भगृह का पहला पत्थर, बोले- सिद्ध हुई 500 सालों की साधना
अयोध्या : CM योगी ने रखा राम मंदिर के गर्भगृह का पहला पत्थर, बोले- सिद्ध हुई 500 सालों की साधना

अयोध्या : CM योगी ने रखा राम मंदिर के गर्भगृह का पहला पत्थर, बोले- सिद्ध हुई 500 सालों की साधना

अयोध्या। श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के गर्भगृह का शिलान्यास शुरू हो गया है। गोरक्ष पीठ के महंत और यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने इसका उद्घाटन किया। इस अवसर पर स्वामी परमानंद सहित राम मंदिर आंदोलन से जुड़े 100 से ज्यादा संतों सहित 300 लोग इस ऐतिहासिक पल के गवाह बने। रामलला की जन्मस्थली से सटे मंदिर को दक्षिण भारत के कलाकारों ने तीन साल में तैयार किया गया है। कार्यक्रम में जगद्गुरु श्रीनिवासाचार्य कांची, श्रीरंग मंदिर वृंदावन के अध्यक्ष स्वामी रंगाचार्य और जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी वासुदेवाचार्य विद्या भास्कर प्रमुख रूप से मौजूद थे। रामलला सदन के महंत जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी राघावाचार्य हैं। उन्होंने बताया कि मंदिर में भगवान श्रीराम, लक्ष्मण और जानकी के साथ भगवान विष्णु, हनुमान जी और रंगनाथ जी सहित जय-विजय की प्रतिमाओं की स्थापना की जा रही हैं। मंदिर में भगवान विष्णु के वाहन गरुड़ के 30 फिट ऊंचे स्तंभ का निर्माण किया गया है। सीएम राम मंदिर से सौ मीटर दूर रामलला की संस्कार स्थली पर तीन साल में बनकर तैयार द्रविड़ शैली के मंदिर श्री रामलला सदन का उद्घाटन करने पहुंचे। इससे पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या के हनुमानगढ़ी मंदिर पहुंचकर पूजा अर्चना की।
सीएम ने कहा कि श्री राम जन्मभूमि मंदिर निर्माण कार्य का शुभारंभ लगभग 2 वर्ष पहले प्रधानमंत्री मोदी के करकमलों से हुआ और सफलतापूर्वक ये निर्माण कार्य आगे बढ़ रहा है। आज ये हमारा सौभाग्य है कि राम जन्मभूमि मंदिर के गर्भगृह में भी शिलाओं को व्यवस्थित रूप से रखने की शास्त्रीय परंपरा के निर्वहन का कार्यक्रम आज पूज्य संतों और न्यास के पदाधिकारियों की उपस्थिति में शुरू हो चुका है। मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम का भव्य मंदिर अयोध्या धाम में बनकर देश और दुनिया के सभी सनातन हिन्दू धर्मावलंबियों की आस्था का प्रतीक तो बनेगा ही, श्री राम जन्मभूमि मंदिर भारत का राष्ट्र मंदिर होगा। राम मंदिर भारत का राष्ट्र मंदिर होगा। अब सैकड़ों वर्षों का इंतजार खत्म होने वाला है क्योंकि तेजी से मंदिर के निर्माण का काम होगा। योगी आदित्यनाथ ने कहा कि शिला पूजन करना बेहद सौभाग्य की बात। गर्भगृह का पहला पत्थर रख दिया है, गोरक्षनाथ पीठ की तीन पीढ़ी इस मंदिर आंदोलन से जुड़ी हुई थी।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि पिछले 500 साल से देश के साधु-संत राम मंदिर आंदोलन को चला रहे थे, आज उन सभी लोगों की आत्मा को शांति की अनुभूति होगी। गर्भगृह का पहला पत्थर रखने के बाद मीडिया से बात करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि आज से शिलाओं के रखने का काम तेजी से शुरू हो जाएगा।
योगी ने कहा अब वो दिन दूर नहीं है जब मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम का भव्य मंदिर अयोध्या धाम में बनकर तैयार हो जाएगा, यह मंदिर भारत का राष्ट्र मंदिर होगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गर्भगृह का पहला पत्थर रख दिया है। इसके साथ ही उन्होंने मंदिर के आर्किटेक्ट के अलावा कारीगरों को सम्मानित किया।
कमल की आकृति का आठ कोण वाला होगा राम मंदिर का गर्भगृह। 6 फिट मोटी दीवार होगी, जिसका बाहरी हिस्सा पिंक स्टोन का होगा। इसका कलश 161 फिट ऊंचा रहेगा। अयोध्या राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा ने कहा- अधिरचना पर काम आज से शुरू हो रहा है। हमारे पास कार्यों को पूरा करने के लिए 3-चरण की समय सीमा है। नृपेंद्र मिश्रा ने कहा 2023 तक गर्भगृह, 2024 तक मंदिर निर्माण और 2025 तक मंदिर परिसर में मुख्य निर्माण पूरा कर लिया जाएगा।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इस कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए सुबह नौ बजे अयोध्या पहुंच गए थे। उन्हें रिसीव करने के लिए उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्या राम कथा पार्क पहुंचे थे। यहां से पहले वह साढ़े नौ बजे हनुमानगढ़ी में दर्शन करने पहुंचे। वहां उन्होंने पूजा अर्चना की। इसके बाद राम जन्मभूमि के लिए रवाना हो गए।
उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्या ने इस मौके पर कहा, देश की सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के बाद राम जन्मभूमि मंदिर निर्माण शुरू हुआ। पहले चरण का काम राम जन्मभूमि परिसर में पूरा हो गया है। आज दूसरे चरण के क्रम में काम शुरू हुआ है। आज का दिन राम भक्तों के लिए है खुशी का दिन। राम भक्तों को शुभकामना। हनुमान जी की कृपा से सब काम हो रहा है। मैं सौभाग्यशाली हूं कि मंदिर निर्माण का साक्षी बन रहा हूं। राम मंदिर आंदोलन के सिपाही के तौर पर मुझे भी मिला है मौका।
एक हजार साल से ज्यादा टिकने वाले राम मंदिर के प्रथम चरण में एक तीर्थ सुविधा केंद्र भी बनेगा। यह लगभग 25 हजार तीर्थ यात्रियों को आवश्यक सुविधाएं प्रदान करेगा। इसे पूरब दिशा में मंदिर पहुंचने के रास्ते के पास बनाया जाएगा। राम मंदिर के अलावा परिसर में भगवान वाल्मीकि, केवट, माता शबरी, जटायु, माता सीता, विघ्नेश्वर (गणेश) और शेषावतार (लक्ष्मण) के मंदिर बनाने की भी योजना है। कुल 70 एकड़ क्षेत्र के भीतर और परकोटा के बाहर मंदिर के आस-पास के क्षेत्र में निर्माण किया जाएगा।
बता दें क‍ि पांच अगस्त 2020 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने राम मंदिर के लिए भूमिपूजन किया था। मंदिर की नींव का काम पूरा हो चुका है और अब गर्भगृह निर्मित होने के साथ ही सांस्कृतिक अस्मिता के नवयुग का आरंभ होगा। यह दिन देखने के लिए रामभक्तों ने करीब पांच शताब्दी तक सुदीर्घ संघर्ष किया और पीढिय़ों ने बलिदान दिया।
ज्योतिषाचार्य आशुतोष वार्ष्णेय ने बताया कि मंदिर का सबसे मुख्य स्थान गर्भगृह होता है। वहां मुख्य मूर्ति स्थापित की जाती है। पॉजिटिव वाइब्रेशन का वह केंद्र होता है क्योंकि वह तीन तरफ से बंद होता है। पृथ्वी की विद्युत चुंबकीय तरेंगें अधिक पाई जाती हैं। मंदिर की वास्तुकला कुछ इस तरह से डिजाइन की जाती है कि गर्भगृह में प्राण ऊर्जा तीव्रतम रहे। वहां हमेशा सकारात्मक दैवीय ऊर्जा निकलती रहती है। यही वजह है कि गर्भगृह में भगवान के दर्शन करने के बाद भक्त ऊर्जावान महसूस करते हैं।
मंदिर के गर्भगृह की दीवारें 6 फीट मोटी बनाई जाएंगी। गर्भगृह और उसके आसपास नक्काशीदार बलुआ पत्थरों को रखना शुरू किया जाएगा। गर्भगृह में मकराना सफेद संगरमरमर का इस्तेमाल किया जाएगा। राजस्थान के भरतपुर जिले की बंसी-पहाड़पुर की पहाड़ियों से गुलाबी बलुआ पत्थरों का इस्तेमाल मंदिर में किया जा रहा है। यहां करीब 4.70 लाख क्यूबिक फीट नक्काशीदार पत्थरों का इस्तेमाल किया जाएगा। राजस्थान से अयोध्या नक्काशी के पत्थर पहुंच रहे हैं।

गर्भगृह को जानिए
आमतौर पर हिंदू मंदिरों का सबसे मुख्य हिस्सा गर्भगृह कहलाता है, जहां मुख्य प्रतिमा रखी जाती है। इसके आसपास स्तंभयुक्त मंडप होता है जो गर्भगृह से जुड़ा होता है। गर्भगृह के चारों और परिक्रमा पथ भी होता है। ऊपर शिखर होता है। सरल शब्दों में समझिए तो मंदिर अगर घर है तो गर्भ गृह सबसे प्रमुख कमरा होता है। जानकार बताते हैं कि यह मंदिर में सबसे ज्यादा सकारात्मक ऊर्जा का केंद्रबिंदु होता है।

याद आई 1949 की वो रात
अयोध्या के राम मंदिर का जिक्र हो रहा हो तो गर्भगृह की महत्ता और भी बढ़ जाती है क्योंकि आजादी के बाद 22-23 दिसंबर 1949 को ऐसा माना जाता है कि रात में गर्भगृह में ही रामलला का प्राकट्य हुआ था। लेकिन मामला कानूनी लड़ाई में फंसा रहा। 6 दिसंबर 1992 को विवादित ढांचे के ध्वंस के बाद रामलला 27 साल तीन महीने और 19 जिन अस्थायी छत के नीचे रहे। आखिरकार 25 मार्च 2022 को रामलला को वैकल्पिक गर्भगृह में रखा गया।

500 साल बाद ‘गर्भ गृह’ में लौटेंगे रामलला
दरअसल, रामलला के गर्भगृह की 500 साल के संघर्ष की लंबी कहानी है। सदियों से राम भक्त अयोध्या में जिस स्थान को रामजन्मभूमि स्थल के रूप में पूजते आए हैं। उसी जगह 1528 में एक आक्रमणकारी ने मस्जिद का निर्माण करवा दिया। इसे बाबरी मस्जिद के नाम से जाना गया। अंग्रेजी हुकूमत के समय 1853 में हिंदू संगठित हुए और उन्होंने आवाज बुलंद की कि भगवान राम के मंदिर को तोड़कर मस्जिद बनाई गई है। यहां पहली बार संघर्ष हुआ। 1947 में देश को अंग्रेजों से आजादी तो मिल गई लेकिन रामलला अब भी ‘कैद’ में रहे। वे अपने ही घर में परदेसी की तरह थे। फिर 23 दिसंबर 1949 की सर्द रात विवादित ढांचे के केंद्र में भगवान राम की मूर्ति का प्राकट्य हुआ। इसके बाद उस स्थान पर हिंदू पूजा-पाठ करने लगे। मुसलमानों ने नमाज पढ़ना बंद किया। 1984 में विश्व हिंदू परिषद ने विवादित स्थल का ताला खोलने और मंदिर निर्माण के लिए अभियान चलाया। 1986 में कोर्ट से हिंदुओं की पूजा की इजाजत देने का फैसला आता है। 1989 में राजीव गांधी सरकार ने विवादित स्थल के पास शिलान्यास की इजाजत दी। 1992 में कारसेवकों ने विवादित ढांचा ढहा दिया। कानूनी लड़ाई जारी रही। 2010 में इलाहाबाद हाई कोर्ट का फैसला आया। मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। आखिरकार 9 नवंबर 2019 को रामलला ने अपने ‘घर’ की कानूनी लड़ाई जीत ली। अब राम मंदिर बनने के बाद रामभक्त अपने जीवन की सबसे बड़ी दिवाली मनाने का इंतजार कर रहे हैं।