तृणमूल कांग्रेस में शामिल हुए बीजेपी के बाबुल

दीदी के गढ़ में बीजेपी को बड़ा झटका

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कोलकाता। पश्चिम बंगाल में बीजेपी को बड़ा झटका लगा है। मोदी सरकार में कैबिनेट मंत्री रह चुके और आसनसोल से सांसद बाबुल सुप्रियो ने तृणमूल कांग्रेस का दामन थाम लिया। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी की मौजूदगी में बाबुल सुप्रियो टीएमसी में शामिल हो गए। टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी और डेरेक ओ ब्रायन की मौजूदगी में उन्होंने तृणमूल कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण की।

बाबुल सुप्रियो के पार्टी में शामिल होने पर टीएमसी की तरफ से बयान जारी कर बताया गया है कि, टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी और राज्यसभा सांसद डेरेक ओ ब्रायन की मौजूदगी में पूर्व केंद्रीय मंत्री और मौजूदा सांसद बाबुल सुप्रियो टीएमसी में शामिल हो गए हैं। हम इस मौके पर हम उनका पार्टी में स्वागत करते हैं। कुछ महीनों पहले केंद्रीय कैबिनेट विस्तार से पहले बाबुल सुप्रियो ने इस्तीफा दे दिया था। बाद में उन्होंने राजनीति से संन्यास भी लेने का ऐलान किया था।

आसनसोल से दो बार के सांसद 50 वर्षीय सुप्रियो उन कई मंत्रियों में शामिल थे, जिन्हें 7 जुलाई को एक बड़े फेरबदल के तहत केंद्रीय मंत्रिपरिषद से हटा दिया गया था। पिछले विधानसभा चुनाव में उन्होंने तृणमूल कांग्रेस के अरूप बिस्वास के खिलाफ विधानसभा चुनाव लड़ा और उन्हें हार का सामना करना पड़ा था।

गायकी से करोड़ों दिलों को जीतने के बाद राजनीति में सात साल की पारी के अंत का ऐलान करते हुए आसनसोल से बीजेपी सांसद और पूर्व मंत्री बाबुल सुप्रियो ने यह भी खुलासा किया था कि वह क्यों और कैसे भगवा दल में शामिल हुए थे। बाबुल सुप्रियो ने कहा था कि योग गुरु बाबा रामदेव के कहने पर उन्होंने बीजेपी जॉइन की थी और उस समय पार्टी को बंगाल में एक भी सीट मिलने की उम्मीद नहीं थी।

बाबुल सुप्रियो ने लिखा था, स्वामी रामदेव से संक्षिप्त बातचीत हुई थी। मुझे यह अच्छा नहीं लगा कि बीजेपी बंगाल को इतनी गंभीरता से ले रही थी, लेकिन उसे एक भी सीट मिलने की उम्मीद नहीं थी। मैंने सोचा कि यह कैसे हो सकता है कि जो बंगाल श्यामा प्रसाद मुखर्जी, अटल बिहारी वाजपेयी का इतना सम्मान करता है वह बीजेपी को एक भी सीट देने से इनकार कर दे। खासकर तब जब पूरे भारत ने चुनाव से पहले तय कर लिया था कि नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बनेंगे, बंगाल क्यों अलग सोचेगा। तब मैंने एक बंगाली के रूप में चुनौती स्वीकार की। सबकी सुनी, लेकिन किया वह जो मेरे दिल ने कहा, बिना कल की चिंता किए।

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