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असुरक्षा’ की भावना बढ़ रही है: भाजपा

श्रीनगर| भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की जम्मू कश्मीर इकाई ने रविवार को कहा कि हाल में आतंकवादियों द्वारा हिंदुओं की हत्या की घटनाओं में आई तेजी के कारण कश्मीरी पंडित कर्मचारियों में असुरक्षा की भावना बढ़ रही है। पार्टी ने कहा कि समुदाय के सदस्यों का इस तरह से घाटी छोड़कर जाना सरकार की पहल पर एक ‘‘काला धब्बा’’ होगा।

भाजपा की जम्मू कश्मीर इकाई के अध्यक्ष रविंदर रैना के नेतृत्व में पार्टी प्रतिनिधिमंडल ने यहां राजभवन में उपराज्यपाल मनोज सिन्हा से मुलाकात की और उन्हें एक ज्ञापन सौंपा, जिसमें पार्टी ने यह भी कहा कि अगर कश्मीरी पंडित कर्मचारी घाटी छोड़ देंगे तो यह एक ‘‘विनाशकारी कदम’’ होगा।

उपराज्यपाल को भाजपा का ज्ञापन कश्मीरी पंडित सरकारी कर्मचारी राहुल भट की हत्या के बाद आया है। भट की हत्या की घटना को लेकर समुदाय के सदस्यों ने विरोध-प्रदर्शन किया है।

ज्ञापन में कहा गया है, ‘‘पिछले एक साल से अधिक समय से घाटी में हिंदुओं की हत्याओं की कई घटनाओं के कारण प्रधानमंत्री पैकेज के तहत नियुक्त कश्मीरी पंडित कर्मचारियों में असुरक्षा की भावना अधिक बढ़ रही है। हर बार किसी हिंदू की हत्या होने पर उन्हें बार-बार आश्वासन दिया जाता था कि इसे दोहराया नहीं जाएगा।

और राहुल भट की दिनदहाड़े एक व्यस्त सरकारी कार्यालय में आतंकवादियों द्वारा की गई हत्या ने उन्हें तोड़ दिया है।’’ भाजपा ने कहा कि भट की हत्या का विरोध करने वाले कश्मीर पंडित कर्मचारियों को केंद्र शासित प्रदेश के प्रशासन से सुरक्षा की भावना प्राप्त करने के बजाय लाठियों और आंसू गैस के गोले का सामना करना पड़ा।

पार्टी ने कहा, ‘‘उनमें से कुछ घायल हो गए और इसका एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है, जिसके परिणामस्वरूप उन्होंने भाजपा विरोधी और (नरेंद्र) मोदी विरोधी नारे लगाए गए, जो पिछले तीन दशकों में पहली बार जम्मू कश्मीर में देखा गया।’’ भाजपा ने कहा कि शुक्रवार को प्रशासन ने कश्मीरी पंडित कर्मचारियों और उनके परिवारों के आवास वाले ट्रांजिट कॉम्प्लेक्स के गेट बंद कर दिए और भोजन, सब्जियां और दूध के लिए बाजार आने-जाने से ‘‘मना’’ कर दिया और उनकी शिकायतों के अनुसार, वे अपने बच्चों को स्कूल नहीं भेज सके।

पार्टी ने कहा, ‘‘वे यहां लाए गए बंधुआ मजदूर नहीं हैं। दिन में जो हुआ वह एक प्रदर्शन था और (वे) गेट खोलने के लिए पुलिस से भिड़े थे। उन्होंने आरोप लगाया कि यह विश्वास बहाली के उपाय के बजाय माहौल गर्म करने वाला कदम था। इसने उन्हें जम्मू, श्रीनगर, बारामूला-कुपवाड़ा, वेसु, मट्टन और केंद्र शासित प्रदेश के बाहर विरोध प्रदर्शन के दौरान मोदी जी और भाजपा विरोधी नारे लगाने के लिए प्रेरित किया।