एनएसए अजीत डोभाल से मिले कैप्टन अमरिंदर सिंह

मैं कांग्रेस में नहीं रहूंगा, बीजेपी में शामिल नहीं होऊंगा

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चंडीगढ़। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से मिलने के बाद गुरुवार को पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल से मुलाकात की। सूत्रों के मुताबिक, सिंह ने डोभाल के आवास पर पहुंचकर उनसे मुलाकात की और दोनों के बीच करीब 30 मिनट तक बैठक चली। सिंह से मिलने के बाद डोभाल गृह मंत्री अमित शाह के आवास के लिए निकल गए।

सिंह के अनुसार, पंजाब से जुड़ी सुरक्षा संबंधी चिंता के चलते वह डोभाल से मिले। अमरिंदर सिंह ने कहा कि पंजाब से जुड़ी सुरक्षा चिंताओं को लेकर उन्होंने डोभाल से मुलाकात की है।

उन्होंने कहा, सुरक्षा चिंताओं को लेकर मैं उनसे मिला हूं। मैं मुख्यमंत्री भले ही नहीं हूं, लेकिन पंजाब तो हमारा है…पहले जैसे हालात न पैदा हों, एनएसए से मुलाकात का यही मकसद था। इससे पहले, सिंह ने बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से उनके आवास पर मुलाकात की जिसकेAjit Doval बाद उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर अटकलें तेज हो गईं।

हालांकि, अमरिंदर सिंह ने कहा कि शाह के साथ उनकी करीब 45 मिनट तक चली मुलाकात के दौरान उन्होंने आग्रह किया कि तीनों कृषि कानूनों को निरस्त करके और न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की गारंटी देकर पिछले 10 महीनों से चल रहे किसानों के आंदोलन के मुद्दे का समाधान किया जाए। दूसरी तरफ, कांग्रेस ने आरोप लगाया कि पंजाब में दलित समुदाय के एक व्यक्ति को मुख्यमंत्री बनाया जाना कुछ लोगों को हजम नहीं हो रहा है और शाह का निवास दलित विरोधी राजनीति का केंद्र बन गया है।

वहीं, पूर्व सीएम अमरिंदर सिंह ने कांग्रेस छोड़ने का ऐलान कर दिया है। अमरिंदर ने कांग्रेस छोड़ने की अटकलों की पुष्टि करते हुए यह भी कहा कि वह बीजेपी में नहीं जा रहे हैं। यानी साफ है कि अगले साल होने वाले पंजाब चुनाव से पहले अमरिंदर सिंह नई पार्टी लॉन्च कर सकते हैं। अमरिंदर सिंह ने 18 सितंबर को पंजाब कांग्रेस के सीएम पद से इस्तीफा दिया था। अमरिंदर ने कहा, मैं अब तक कांग्रेस में हूं लेकिन आगे नहीं रहूंगा। मैंने पहले ही अपनी पोजिशन स्पष्ट कर दी है कि मेरे साथ इस तरह का व्यवहार नहीं किया जाएगा। मैं कांग्रेस में 50 साल से हूं। मैंने बताया कि सबको पता है कि मेरे अपने मत हैं, अपने सिद्धांत हैं।
अमरिंदर सिंह ने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा, ‘जिस तरह मेरे साथ कांग्रेस के अंदर व्यवहार हुआ, साढ़े 10 बजे मुझे हाईकमान कॉल करते हैं कि आप इस्तीफा दे दो। मैंने एक बार भी नहीं पूछा क्यों, मैंने तुरंत इस्तीफा लिखकर 4 बजे राज्यपाल को दे दिया। जो पर्यवेक्षक आए थे उन्होंने सबको कॉल किया लेकिन सीएम हाउस में किसी ने नहीं जाना। अगर 50 साल बाद मेरी विश्वसनीयता पर शक हो रहा है तो फिर कुछ बचा नहीं। मेरे साथ ऐसा व्यवहार नहीं जाएगा।

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