Tuesday , September 27 2022

कोयला आयात की अतिरिक्त लागत वहन करे केंद्र

नयी दिल्ली| ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन (एआईपीईएफ) ने केंद्र सरकार द्वारा आज पुनः कोयला आयात करने के निर्देश को राज्यों पर बेजा दबाव डालने की कोशिश बताया है। एआईपीईएफ ने अपनी इस मांग को दोहराया है कि चूंकि कोयला संकट में राज्य के बिजली उत्पादन संयंत्रों का कोई दोष नहीं है अतः केंद्र सरकार को कोयला आयात के अतिरिक्त खर्च को खुद वहन करना चाहिए।

एआईपीईएफ ने एक बयान में कहा कि वर्तमान कोयला संकट बिजली, कोयला और रेलवे जैसे केंद्र सरकार के मंत्रालयों के बीच समन्वय की कमी के कारण पैदा हुआ है। इसलिए राज्यों पर कोयला आयात करने के लिए अनुचित दबाव नहीं डाला जाए।

बिजली मंत्रालय ने बुधवार को चेतावनी दी कि यदि 31 मई, 2022 तक कोयला आयात के आदेश नहीं दिए जाते हैं और आयातित ईंधन 15 जून तक बिजली संयंत्रों में पहुंचना शुरू नहीं होता है, तो चूक करने वाली बिजली उत्पादक कंपनियों को अपने आयात को 15 प्रतिशत तक बढ़ाना होगा।

मंत्रालय ने स्वतंत्र बिजली उत्पादकों सहित राज्य सरकारों और बिजली उत्पादन कंपनियों (जेनको) को लिखे पत्र में कहा कि इसके अलावा अगर 15 जून तक घरेलू कोयले के साथ सम्मिश्रण शुरू नहीं किया जाता है, तो संबंधित चूककर्ता ताप विद्युत संयंत्रों के घरेलू आवंटन में पांच प्रतिशत की कमी की जायेगी। एआईपीईएफ ने कहा, ‘‘यह केंद्र सरकार द्वारा राज्यों पर अनुचित दबाव डालने का प्रयास है। कोयला संकट राज्य के बिजली उत्पादन घरों की गलती नहीं है, इसलिए कोयले के आयात की अतिरिक्त लागत केंद्र सरकार को वहन करनी चाहिए। एआईपीईएफ के अध्यक्ष शैलेंद्र दुबे ने कहा कि केंद्र द्वारा आज (बुधवार) जारी किया गया आदेश ‘‘अनुचित और जायज नहीं है।’’

उन्होंने आगे कहा कि एक तरफ केंद्र यह दावा कर रहा है कि भारत में अप्रैल तक कोयले का उत्पादन पिछले साल की तुलना में अधिक है और कोयले का कोई संकट नहीं है, दूसरी तरफ सरकार कह रही है कि बिजली घर कोयले का आयात करें।