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तोहफा : लाइट हाउस का शिलान्यास … 6 राज्यों को शुद्ध लाभ

लखनऊ: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नए साल के पहले दिन शुक्रवार (01 जनवरी) को वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए छह राज्‍यों अगरतला (त्रिपुरा), रांची (झारखंड), लखनऊ (उत्तर प्रदेश), इंदौर (मध्य प्रदेश), राजकोट (गुजरात) और चेन्नई (तमिलनाडु) में ग्लोबल हाउसिंग टेक्नोलॉजी चैलेंज इंडिया (जीएचटीसी-इंडिया) के तहत लाइट हाउस परियोजनाओं की आधारशिला रखी। वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से आयोजित समारोह में मोदी ने सस्‍ते और टि‍काऊ आवासीय उत्‍प्रेरक (एएसएचए- इंडिया) के तहत विजेताओं की घोषणा भी की। उन्होंने प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) को लागू करने में उत्‍कृष्‍टता के लिए वार्षिक पुरस्कार भी प्रदान किए।

इस अवसर पर आवास एवं शहरी मामलों के मंत्री हरदीप सिंह पुरी के अलावा त्रिपुरा, झारखंड, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, गुजरात, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश के राज्यपाल और मुख्यमंत्री उपस्थित थे। प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर नवारिति‍ह के नाम से नवोन्मेषी निर्माण प्रौद्योगिकी पर एक पाठ्यक्रम की शुरुआत की और 54 नवोन्मेषी आवासीय निर्माण प्रौद्योगिकी के एक संग्रह का विमोचन भी किया।

प्रधानमंत्री कार्यालय के मुताबिक हल्के मकान से जुड़ी परियोजनाएं देश में पहली बार निर्माण क्षेत्र में इतने बड़े पैमाने पर नए जमाने की वैकल्पिक वैश्विक प्रौद्योगिकी, सामग्री और प्रक्रियाओं का बेहतरीन प्रदर्शन करती हैं। इनका निर्माण जीएचटीसी- इंडिया के तहत किया जा रहा है। इन हल्के मकानों का निर्माण इंदौर, राजकोट, चेन्नई, रांची, अगरतला और लखनऊ में किया जा रहा है। हर जगह इस तरह के एक हजार आवासों का निर्माण किया जाना है। यह निर्माण कार्य एक साल के भीतर पूरा कर लिये जाने की संभावना है। मोदी ने आशा इंडिया (अफोर्डेबल सस्टेनेबल हाउसिंग एक्सेलरेटर) अवॉर्ड्स भी दिए। इसमें यूपी को पहला और मध्यप्रदेश को दूसरा स्थान मिला। इसके अलावा वे आवास योजना (अर्बन) के तहत किए गए कामों के लिए वार्षिक पुरस्कारों की भी घोषणा की।

तेज गति से आगे बढ़ने का शुभारंभ

पीएम मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि आज नई ऊर्जा के साथ, नए संकल्पों के साथ और नए संकल्पों को सिद्ध करने के लिए तेज गति से आगे बढ़ने का आज शुभारंभ है। ये 6 प्रोजेक्ट वाकई लाइट हाउस यानी प्रकाश स्तंभ की तरह हैं। ये 6 प्रोजेक्ट देश में हाउसिंग कंस्ट्रक्शन को नई दिशा दिखाएंगे। ये लाइट हाउस प्रोजेक्ट अब देश के काम करने के तौर-तरीकों का उत्तम उदाहरण है। हमें इसके पीछे बड़े विजन को भी समझना होगा। एक समय आवास योजनाएं केंद्र सरकारों की प्राथमिकता में उतनी नहीं थी, जितनी होनी चाहिए। सरकार घर निर्माण की बारिकियों और क्वालिटी में नहीं जाती थी।

ये प्रोजेक्ट आधुनिक तकनीक और इनोवेटिव प्रोसेस से बनेंगे। इसमें कंस्ट्रक्शन का समय कम होगा और गरीबों के लिए ज्यादा अफोर्डेबल और कम्फ़र्टेबल घर तैयार होंगे। विशेषज्ञों को तो इसके विषय में पता है। लेकिन देशवासियों को भी इनके बारे में जानना जरूरी है। क्योंकि आज तो ये तकनीक एक शहर में इस्तेमाल हो रही है , कल को इन्हीं का विस्तार पूरे देश में किया जा सकता है।

सबसे बड़ा सपना होता है- अपना घर

पीएम मोदी ने कहा कि देश में ही आधुनिक हाउसिंग तकनीक से जुड़ी रिसर्च और स्टार्टअप्स को प्रमोट करने के लिए आशा इंडिया प्रोग्राम चलाया जा रहा है। इसके माध्यम से भारत में ही 21वीं सदी के घरों के निर्माण की नई और सस्ती तकनीक विकसित की जाएगी। अब देश का फोकस है गरीब और मध्यम वर्ग की जरूरतों पर। अब देश ने प्राथमिकता दी है शहर में रहने वाले लोगों की संवेदनाओं और उनकी भावनाओं को। शहर में रहने वाले गरीब हों या मध्यम वर्ग, इन सबका सबसे बड़ा सपना होता है, अपना घर। पीएम मोदी ने कहा कि वो घर जिसमें उनकी खुशियां, सुख-दुख, बच्चों की परवरिश जुड़ी होती हैं।

लेकिन बीते वर्षों में लोगों का अपने घर को लेकर भरोसा टूटता जा रहा था। घरों की कीमतें इतनी ज्यादा हो गईं थी कि अपने घर का भरोसा टूटने लगा था।  एक वजह ये थी कि कानून हमारा साथ देगा या नहीं, हाउसिंग सेक्टर की ये स्थिति थी कि लोगों को शंका थी कि गड़बड़ हो जाने की स्थिति में कानून उनका साथ नहीं देगा। बैंक की ऊंची ब्याज दर, कर्ज मिलने में होने वाली दिक्कतें भी इसका एक कारण थीं।

होम लोन पर ब्याज में छूट

पीएम मोदी ने कहा कि अगर हम पीएम आवास योजना के अंतर्गत बनाएं गए लाखों घरों के काम पर नजर डालें तो उसमें इनोवेशन और इम्प्लीमेंटेशन दोनों पर फोकस मिलेगा। गरीबों को मिलने वाले घर के साथ-साथ दूसरी योजना को भी एक पैकेज की तरह जोड़ा गया है। गरीब को जो घर मिल रहे हैं, उसमें पानी, बिजली, गैस, शौचालय और अन्य आवश्यक सुविधाएँ सुनिश्चित की जा रही हैं। सरकार के प्रयासों का बहुत बड़ा लाभ शहरों में रहने वाले मध्यम वर्ग को हो रहा है। मध्यम वर्ग को अपने घर के लिए एक तय राशि के होम लोन पर ब्याज में छूट दी जा रही है।

रेरा जैसे कानून की शक्ति

पीएम मोदी ने कहा कि कोरोना संकट के समय भी सरकार ने होम लोन पर ब्याज पर छूट की विशेष योजना शुरु की। लोगों के पास अब रेरा जैसे कानून की शक्ति भी है। रेरा ने लोगों में ये भरोसा लौटाया है कि जिस प्रोजेक्ट में वो पैसा लगा रहे हैं, वो पूरा होगा, उनका घर अब फसेंगा नहीं। आज देश में लगभग 60 हजार रियल एस्टेट प्रोजेक्ट रेरा के तहत रजिस्टर्ड हैं। इस कानून के तहत हजारों शिकायतों का निपटारा किया जा चुका है। हाउसिंग फॉर ऑल इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए जो चौतरफा काम किया जा रहा है, वो करोड़ गरीबों और मध्यम वर्ग परिवारों के जीवन में परिवर्तन ला रहा है।

पीएम मोदी ने कहा कि ये घर गरीबों के आत्मविश्वास को बढ़ा रहे हैं। ये घर देश के युवाओं का सामर्थ्य को बढ़ा रहे हैं। इन घरों की चाबी से कई द्वार खुल रहे हैं। घर की चाबी हाथ आने से सम्मानजनक और सुरक्षित जीवन का द्वार खुलता है। इससे एक आत्मविश्वास आता है। ये चाबी उनकी प्रगति का द्वार भी खोल रही है।

हाउसिंग फॉर ऑल का सपना जरूर पूरा होगा

पीएम मोदी ने कहा कि पिछले साल कोरोना संकट के दौरान ही एक और बड़ा कदम भी उठाया गया है। ये कदम है अफोर्डेबल रेंटल हाउसिंग काम्प्लेक्स योजना। इस योजना का लक्ष्य हमारे वो श्रमिक साथी हैं, जो एक राज्य से दूसरे राज्य में या गांव से शहर में आते हैं। बीते सालों में जो रिफॉर्म किए गये है उसमें कंस्ट्रक्शन परमिट को लेकर हमारी रैंकिंग 185 से सीधे 27 पर आ गई है। कंस्ट्रक्शन से जुड़ी परमिशन के लिए ऑनलाइन व्यवस्था का विस्तार 2,000 से ज्यादा शहरों में हो गया है। इंफ्रास्ट्रक्चर और कंस्ट्रक्शन पर होने वाला निवेश और विशेषकर हाउसिंग सेक्टर पर किया जा रहा खर्च अर्थव्यवस्था में फोर्स मल्टीप्लायर का काम करता है।

इतनी बड़ी मात्रा में स्टील, सीमेंट, कंस्ट्रक्शन मैटीरियल का लगना पूरे सेक्टर को गति देता है। देश का रियल एस्टेट सेक्टर निरंतर मजबूत हो इसके लिए सरकार की कोशिश लगातार जारी है। मुझे विश्वास है कि हाउसिंग फॉर ऑल का सपना जरूर पूरा होगा।

ईंट-गारे का नहीं होगा इस्तेमाल

इंदौर की तकनीक में मकान निर्माण में ईंट-गारा नहीं होगा। इसमें प्री फेबरिकेटिड सैंडविच पैनल सिस्टम का इस्तेमाल होगा। गुजरात के राजकोट में टनल के जरिए मोनोलीथिक कंक्रीट तकनीक का इस्तेमाल होगा। यह फ्रांस की तकनीक है जिससे मकान निर्माण को गति मिलेगी और घर आपदाओं को झेलने में ज्यादा सक्षम होगा। चेन्नई में अमेरिका और फिनलैंड की प्री कास्ट कंक्रीट तकनीक का इस्तेमाल होगा जिसमें घर तेजी से बनेगा और सस्ता भी होगा। झारखंड के रांची में जर्मनी के 3डी तकनीक से घर बनाए जाएंगे। हर कमरा अलग से बनेगा, फिर लेगो ब्लॉग के घर की तरह इन्हें जोड़ा जाएगा। अगरतला में भूंकप का खतरा देखते हुए स्टील फ्रेम वाली तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा।

लखनऊ में कनाडा की तकनीक, प्लास्टर और पेंट की जरूरत नहीं होगी, पहले से बनी दीवारों से घर तेजी से बनेंगे। 12 महीनों में हर शहर में हजार-हजार घर (एक साल में) बनाएं जाएंगे। मतलब प्रति दिन ढाई से 3 घर बनेंगे। एक महीने में करीब 90-100 मकान बनेंगे। अगली जनवरी तक इस काम में सफलता पाने का इरादा है।

भूकंप का नहीं होगा असर

प्रधानमंत्री नरेंद्र ने जिन-जिन प्रदेशों में लाइट हाउस प्रोजेक्ट का शिलान्यास किया, वहां पहले से तैयारियां शुरू हो गई हैं। इस प्रोजेक्ट में खास तकनीक का इस्तेमाल कर सस्ते मकान बनाए जाते हैं। दरअसल, इस प्रोजेक्ट में फैक्टरी से बीम-कॉलम और पैनल तैयार कर मौके पर लाए जाते हैं, जिससे निर्माण की अवधि और लागत कम हो जाती है। मकान के निर्माण में समय भी कम लगता है। काम जल्दी होता है, इसलिए प्रोजेक्ट की लागत भी कम होती है।

इस प्रोजेक्ट में जो मकान बनाए जाएंगे, वो पूरी तरह से भूकंपरोधी होंगे। भारत में पहली बार ऐसी तकनीक का इस्तेमाल हो रहा है। मध्य प्रदेश के इंदौर में इस प्रोजेक्ट की तैयारी तेजी से चल रही है। मकान प्लस आठ आकार के होंगे। इंदौर के प्रोजेक्ट में जापानी कंपनी की टेक्नोलॉजी का भी इस्तेमाल हो रहा है। मकान के लिए अलग-अलग टॉवर बनाए जाएंगे और यह लगभग साल भर में पूरा कर लिया जाएगा।

खास तकनीक का इस्तेमाल

इस प्रोजेक्ट की विशेषता यह है कि जहां निर्माण होना है, वही पर मकान के बीम, कॉलम और पैनल एकसाथ फिट किए जाते हैं। बीम और कॉलम आदि का निर्माण कहीं और होता है लेकिन जहां मकान बनना होता है, वहां इसे फिट किया जाता है। जैसे अन्य मकानों में बनाने के बाद पानी से तर करना पड़ता है, लेकिन इस प्रोजेक्ट में बनाए जाने वाले निर्माण में पानी की जरूरत नहीं पड़ती। इससे पानी की बचत होती है. पर्यावरण के लिहाज से इस प्रोजेक्ट को काफी अच्छा माना जाता है। इन मकानों का वजन काफी हल्का होता है। हल्के निर्माण होने की वजह से मकान के पूरे टॉवर पर ज्यादा दबाव नहीं पड़ता।

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