Thursday , July 7 2022

राज्‍यपाल ने आम लोगों के लिए खोले UP राजभवन के दरवाजे

लखनऊ। राज्‍यपाल आनंदीबेन पटेल ने राजभवन के दरवाजे आम लोगों के लिए खोलने का ऐलान किया। लोग रोज सुबह 5 से 7 बजे तक वहां सुबह की सैर, व्‍यायाम और योगाभ्‍यास कर सकेंगे। राज्‍यपाल ने यह ऐलान मंगलवार को राजभवन में आयोजित योगाभ्‍यास कार्यक्रम में किया। इस मौके पर सीएम योगी आदित्‍यनाथ और प्रदेश के आयुष मंत्री स्‍वतंत्र प्रभार दयाशंकर मिश्र ‘दयालु’ भी मौजूद रहे।

उन्‍होंने कहा- ‘देखिए इतना बड़ा राजभवन है। इतनी अच्‍छी लेन वगैरह हैं। इतने पेड़ पौधे हैं लेकिन मुझे कभी-कभी चिंता भी होती है कि इसका लाभ न आसपास की जनता लेती है न हमारे राजभवन के निवासी लेते हैं। मैं आज आप सबको आह्वान करती हूं कि सुबह 5 से 7 बजे तक यह योग, योगाभ्‍यास के लिए, मार्निंग वॉक के लिए राजभवन आपके लिए खुला रहेगा। आइए घूमिए, वॉक करिए, व्‍यायाम करिए, योगाभ्‍यास करिए और अपने जीवन को स्‍वास्‍थ्‍यमय बनाइए और सुख और समृद्ध‍ि पाइए। सुख और समृद्ध‍ि तभी मिलता है जब हम स्‍वस्‍थ रहते हैं। पैसे आपको समृद्ध‍ि और तन-मन को स्‍वस्‍थ नहीं बनाएंगे लेकिन अच्‍छी सोच, अच्‍छे विचार, अच्‍छे काम, सेवाभाव मिलकर आपको स्‍वस्‍थ बनाएंगे। शरीर स्‍वस्‍थ लेकिन मन में गंदे विचार आते हैं तो यह शरीर स्‍वस्‍थ नहीं है।’

राज्‍यपाल ने कहा कि सुबह सूर्योदय से पहले उठना चाहिए। मैं खुद इसका पालन करती हूं। 10 बजे के बाद जागना ही नहीं, सो ही जाती हूं। यह आदत हमें डाली है पिताजी ने। वो आदत आज भी हमने मेंटेन किया है। दिन भर में 8 किलोमीटर चलता, शुद्ध आहार खाना। 25-50 ग्राम से ज्‍यादा तेल पेट में नहीं जाना चाहिए। हमें खुद, परिवार और समाज के लिए संकल्‍प लेना होगा। जैसे सुबह में इतने बजे उठेंगे, योग करेंगे। समय निकालकर चलने का प्रयास भी करेंगे।

कोविड के चलते दो साल नहीं आयोजित हो पाया था कार्यक्रम
कोविड की वजह से राजभवन में पिछले दो साल अंतरराष्‍ट्रीय योग दिवस पर कार्यक्रम नहीं हो पाया था। आज राज्‍यपाल ने कहा कि मुझे खुशी है कि दो साल के अंतराल के बाद आज राजभवन योगाभ्‍यास में लीन हो गया। आज का दिन हमारे और पूरे विश्‍व के लिए ऐतिहासिक दिन है। गौरव के लिए भी हमें इस दिन को याद करना चाहिए क्‍योंकि प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने पूरे विश्‍व को योगाभ्‍यास में लीन करने का काम किया। वर्षों से योग, योगाभ्‍यास, साधना हमारे ऋषि मुनि जंगल, नदियों के किनारे बैठकर करते थे, हमें भी सिखाते थे लेकिन यह देश में ही सीमित था। आज विश्‍व में करोड़ों लोग योग कर रहे हैं और सीख-सिखा रहे हैं। यह एक दिन के लिए नहीं होना चाहिए। जीवन का हिस्‍सा बनना चाहिए। सुबह उठने से रात को सोने तक के बीच में कभी न कभी समय निकालकर योग की एक या दो प्रक्रिया करनी ही चाहिए। अभी तो देश में कई स्‍थान भी बन चुके हैं जहां जाकर साधना कर सकते हैं।

स्‍कूलों में भी कराया जाए योग
राज्‍यपाल ने कहा कि योग को स्‍कूलों में भी शामिल किया जाना चाहिए। कई स्‍कूलों में जगह न होने की वजह से न प्रार्थना होती है। न व्‍यायाम होता है। जन्‍म से ही बच्‍चों में इसकी आदत डालें तो आगे जाकर स्‍वास्‍थ्‍य के लिए हमें कोई चिंता नहीं करनी पड़ेगी। जब हम छोटे थे तो ऐसे कार्यक्रम नहीं होते थे लेकिन आज भी 105, 110 साल तक जीने वाले बहुत से उदाहरण हमारे सामने हैं। हमारे माता पिता, दादा-दादी जो काम करते और हमसे करवाते थे वो स्‍वास्‍थ्‍य के लिए बहुत अच्‍छे थे। सुबह 4 बजे उठना, खेत में जाकर मिलजुलकर काम करना। खेत से वापस आकर पशुओं की सेवा करना, साफ-सफाई करना, पानी भरना आदि काम खुशी से घर के लोग मिलजुलकर करते थे। फिर शुद्ध दूध और रोटी-सब्‍जी खाकर स्‍कूल जाते थे। रोज 4 किलोमीटर पैदल चलकर जाने और आने की प्रक्रिया चलती रहती थी। फिर स्‍कूल से लौटकर खेतों में जाकर काम करना दिनचर्या का अंग था। धीरे-धीरे शहरीकरण हुआ। लोग शहरों में आ गए। पुरानी आदतें छूट गईं। घर में खाना भी कम हो गया है। होटलों में खाना बढ़ गया है। अब लगता है कि 360 डिग्री परिवर्तन करने की आवश्‍यकता है। इस बार का थीम भी वही है-‘मानवता के लिए योग।’ हम मानवता की चिंता कम करने लगे थे। लेकिन कोरोना के समय में हम फिर से मानवता की ओर लौटे। शायद कोई घर नहीं बचा जहां कोई कोरोना से पीड़ित न हुआ हो। अस्‍पताल भरे थे। दवाई, बेड, ऑक्‍सीजन, राशन, भोजन की आवश्‍यकता हो, किसी ने भी पीछे मुड़कर नहीं देखा।