Monday , September 26 2022
मन की बात में PM Modi ने की पर्यावरण और योग दिवस को लेकर ये अपील
मन की बात में PM Modi ने की पर्यावरण और योग दिवस को लेकर ये अपील

मन की बात में PM Modi ने की पर्यावरण और योग दिवस को लेकर ये अपील

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार (29 मई) देश की जनता को मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के जरिये संबोधित किया। इस कार्यक्रम को टीवी, फेसबुक, ट्विटर, YouTube और मोबाइल एप पर भी लाइव प्रसारित किया गया। ये ‘मन की बात’ का 89वां संस्करण है। मालूम हो कि ये कार्यक्रम हर महीने के अंतिम रविवार को प्रसारित होता है। कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों और वरिष्ठ बीजेपी नेताओं ने अपने आवास पर कार्यकर्ताओं के साथ पीएम मोदी की मन की बात को सुना। पीएम मोदी ने कहा कि कुछ दिन बाद ही, 5 जून को विश्व, ‘पर्यावरण दिवस’ के रूप में मनाता है। पर्यावरण को लेकर हमें अपने आस-पास के सकारात्मक अभियान चलाने चाहिए और ये निरंतर करने वाला काम है आप, इस बार सब को साथ जोड़ कर- स्वच्छता और वृक्षारोपण के लिए कुछ प्रयास ज़रूर करें। आप, खुद भी पेड़ लगाइये और दूसरों को भी प्रेरित करिए। अगले महीने 21 जून को, हम 8वाँ ‘अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस’ मनाने वाले हैं। इस बार ‘योग दिवस’ की theme है – Yoga for humanity मैं आप सभी से ‘योग दिवस’ को बहुत ही उत्साह के साथ मनाने का आग्रह करूँगा। कोरोना से जुड़ी सावधानियां भी बरतें, वैसे, अब तो पूरी दुनिया में कोरोना को लेकर हालात पहले से कुछ बेहतर लग रहे हैं। अधिक-से-अधिक vaccination coverage की वजह से अब लोग पहले से कहीं ज्यादा बाहर भी निकल रहे हैं, इसलिए, पूरी दुनिया में ‘योग दिवस’ को लेकर काफी तैयारियाँ भी देखने को मिल रही हैं। कोरोना महामारी ने हम सभी को यह एहसास भी कराया है, कि हमारे जीवन में, स्वास्थ्य का, कितना अधिक महत्व है, और योग, इसमें कितना बड़ा माध्यम है, लोग यह महसूस कर रहे हैं कि योग से physical, spiritual और intellectual well being को भी कितना बढ़ावा मिलता है। विश्व के top Business person से लेकर film और sports personalities तक, students से लेकर सामान्य मानवी तक, सभी, योग को अपने जीवन का अभिन्न अंग बना रहे हैं। मुझे पूरा विश्वास है, कि दुनिया भर में योग की बढ़ती लोकप्रियता को देखकर आप सभी को बहुत अच्छा लगता होगा।
इस बार देश-विदेश में ‘योग दिवस’ पर होने वाले कुछ बेहद innovative उदाहरणों के बारे में मुझे जानकारी मिली है। इन्हीं में से एक है Guardian Ring – एक बड़ा ही unique programme होगा। अलग-अलग देशों में Indian missions वहाँ के local time के मुताबिक सूर्योदय के समय योग कार्यक्रम आयोजित करेंगे। एक देश के बाद दूसरे देश से कार्यक्रम शुरू होगा। पूरब से पश्चिम तक निरंतर यात्रा चलती रहेगी, फिर ऐसे ही, ये, आगे बढ़ता रहेगा। इन कार्यक्रमों की streaming भी इसी तरह एक के बाद एक जुड़ती जायेगी, यानी, ये, एक तरह का Relay Yoga Streaming Event होगा। आप भी इसे जरूर देखिएगा। हमारे देश में इस बार ‘अमृत महोत्सव’ को ध्यान में रखते हुए देश के 75 प्रमुख स्थानों पर भी ‘अंतरराष्ट्रीय योग दिवस’ का आयोजन होगा। इस अवसर पर कई संगठन और देशवासी ने अपने-अपने स्तर पर अपने-अपने क्षेत्र की खास जगहों पर कुछ न कुछ Innovative करने की तैयारी कर रहे हैं। आपसे भी ये आग्रह करूँगा, इस बार योग दिवस मनाने के लिए, आप, अपने शहर, कस्बे या गाँव के किसी ऐसी जगह चुनें, जो सबसे खास हो। ये जगह कोई प्राचीन मंदिर और पर्यटन केंद्र हो सकता है, या फिर, किसी प्रसिद्ध नदी, झील या तालाब का किनारा भी हो सकता है। इससे योग के साथ-साथ आपके क्षेत्र की पहचान भी बढ़ेगी और पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। इस समय ‘योग दिवस’ को लेकर 100 Day Countdown भी जारी है, या यूँ कहें कि निजी और सामाजिक प्रयासों से जुड़े कार्यक्रम, तीन महीने पहले ही शुरू हो चुके हैं। जैसा कि दिल्ली में 100वें दिन और 75वें दिन के countdown Programmes हुए हैं। वहीं, असम के शिवसागर में 50वें और हैदराबाद में 25वें Countdown Event आयोजित किये गए। मैं चाहूँगा कि आप भी अपने यहाँ अभी से ‘योग दिवस’ की तैयारियाँ शुरू कर दीजिये | ज्यादा से ज्यादा लोगों से मिलिए, हर किसी को ‘योग दिवस’ के कार्यक्रम में जुड़ने के लिए आग्रह कीजिये, प्रेरित कीजिये। मुझे पूरा भरोसा है कि आप सभी ‘योग दिवस’ में बढ़-चढ़कर के हिस्सा लेंगे, साथ ही योग को अपने दैनिक जीवन में भी अपनाएंगे। कुछ दिन पहले मैं जापान गया था। अपने कई कार्यक्रमों के बीच मुझे कुछ शानदार शख्सियतों से मिलने का मौका मिला। मैं, ‘मन की बात’ में, आपसे, उनके बारे में चर्चा करना चाहता हूँ। वे लोग हैं तो जापान के, लेकिन भारत के प्रति इनमें गज़ब का लगाव और प्रेम है। इनमें से एक हैं हिरोशि कोइके जी, जो एक जाने-माने Art Director हैं। आपको ये जानकार बहुत ही ख़ुशी होगी कि इन्होंने Mahabharat Project को Direct किया है। इस Project की शुरुआत Cambodia में हुई थी और पिछले 9 सालों से ये निरंतर जारी है। हिरोशि कोइके जी हर काम बहुत ही अलग तरीके से करते हैं। वे, हर साल, एशिया के किसी देश की यात्रा करते हैं और वहां Local Artist और Musicians के साथ महाभारत के कुछ हिस्सों को Produce करते हैं। इस Project के माध्यम से उन्होंने India, Cambodia और Indonesia सहित नौ देशों में Production किये हैं और Stage Performance भी दी है। हिरोशि कोइके जी उन कलाकारों को एक साथ लाते हैं, जिनका Classical और Traditional Asian Performing Art में Diverse Background रहा है। इस वजह से उनके काम में विविध रंग देखने को मिलते हैं। खास बात ये है कि इसमें प्रत्येक performer अपनी ही मातृ-भाषा में बोलता है और Choreography बहुत ही खूबसूरती से इस विविधता को प्रदर्शित करती है और Music की Diversity इस Production को और जीवंत बना देती है। उनका उद्देश्य इस बात को सामने लाना है कि हमारे समाज में Diversity और Co-existence का क्या महत्व है और शांति का रूप वास्तव में कैसा होना चाहिए। इनके अलावा, मैं, जापान में जिन अन्य दो लोगों से मिला, वे हैं, आत्सुशि मात्सुओ जी और केन्जी योशी जी। ये दोनों ही TEM Production Company से जुड़े हैं। इस company का संबंध रामायण की उस Japanese Animation Film से है, जो 1993 में Release हुई थी। इसमें Indian Animators ने भी उनकी काफी मदद की, उन्हें फिल्म में दिखाए गए भारतीय रीति-रिवाजों और परम्पराओं के बारे में guide किया गया। उन्हें बताया गया कि भारत में लोग धोती कैसे पहनते हैं, साड़ी कैसे पहनते हैं, बाल कैसे बनाते हैं। बच्चे परिवार के अंदर एक-दूसरे का मान-सम्मान कैसे करते हैं, आशीर्वाद की परंपरा क्या होती। हमसे हज़ारों किलोमीटर दूर जापान में बैठे लोग जो न हमारी भाषा जानते हैं, जो न हमारी परम्पराओं के बारे में उतना जानते हैं, उनका हमारी संस्कृति के लिए समर्पण, ये श्रद्धा, ये आदर, बहुत ही प्रशंसनीय है। कौन हिन्दुस्तानी इस पर गर्व नही करेगा? प्रात: उठ करके अपने घर के जो senior हैं उनको प्रणाम करना, उनके आशीर्वाद लेना – ये सारी बातें अब 30 सालों के बाद ये animation film फिर से 4K में re-master की जा रही है। इस project के जल्द ही पूरा होने की संभावना है। हमसे हज़ारों किलोमीटर दूर जापान में बैठे लोग जो न हमारी भाषा जानते हैं, जो न हमारी परम्पराओं के बारे में उतना जानते हैं, उनका हमारी संस्कृति के लिए समर्पण, ये श्रद्धा, ये आदर, बहुत ही प्रशंसनीय है – कौन हिन्दुस्तानी इस पर गर्व नही करेगा?