Thursday , October 6 2022
राज ठाकरे के विरोध में सांसद बृजभूषण को मिला संतों का साथ, कहा- माफी मांगें तभी अयोध्या में प्रवेश
राज ठाकरे के विरोध में सांसद बृजभूषण को मिला संतों का साथ, कहा- माफी मांगें तभी अयोध्या में प्रवेश

राज ठाकरे के विरोध में सांसद बृजभूषण को मिला संतों का साथ, कहा- माफी मांगें तभी अयोध्या में प्रवेश

अयोध्या। मनसे प्रमुख राज ठाकरे के पांच जून को प्रस्तावित आगमन के विरोध में गुरुवार को भी हलचल व्याप्त रही। महाराष्ट्र में उत्तर भारतीयों के उत्पीड़न के सवाल पर राज की यात्रा के विरोध का नेतृत्व कर रहे भाजपा सांसद एवं कुश्ती संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष बृजभूषणशरण सिंह को संतों का आशीर्वाद मिला। संतों ने आशीर्वाद के साथ राज के विरोध में बृजभूषण सिंह के अभियान को जायज ठहराया।
सांसद ने जिन संतों से उनके आश्रम जाकर भेंट की, उनमें मणिरामदास जी की छावनी के महंत एवं रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्यगोपालदास, मंदिर आंदोलन के अग्रणी नेता रहे पूर्व सांसद डा. रामविलासदास वेदांती, रामलला के प्रधान अर्चक आचार्य सत्येंद्रदास, जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी रामदिनेशाचार्य, हनुमानबाग के महंत जगदीशदास, दिगंबर अखाड़ा के महंत सुरेशदास, जगद्गुरु परमहंस आचार्य, आंजनेय सेवा संस्थान के अध्यक्ष महंत शशिकांतदास, महामंडलेश्वर महंत गिरीशदास, संत छविरामदास आदि रहे।
बृजभूषण सिंह रामवल्लभाकुंज भी गए, किंतु मंदिर के अधिकारी राजकुमारदास से उनकी भेंट नहीं हो सकी। वह अयोध्या के बाहर गए थे। यद्यपि राजकुमारदास उन संतों में अग्रणी हैं, जिन्होंने राज ठाकरे के विरोध में सबसे पहले बृजभूषण सिंह का समर्थन किया। महंत नृत्यगोपालदास अस्वस्थता के चलते सांसद को आशीर्वाद देने के अलावा अधिक नहीं बोल पाए, किंतु उनके उत्तराधिकारी महंत कमलनयनदास भी बृजभूषण सिंह के साथ खड़े होने वाले अग्रणी संतों में हैं।
रामलला के प्रधान अर्चक आचार्य सत्येंद्रदास ने कहा, राज ठाकरे यदि दिल से रामलला का दर्शन करना चाहते हैं, तो उत्तर भारतीयों से माफी माांगे। सांसद बृजभूषण सिंह की यह मांग सर्वथा न्याय संगत है। हम राज ठाकरे के नेतृत्व में उत्तर भारतीयों का उत्पीड़न नहीं भूल सकते।
र्व सांसद डा. रामविलासदास वेदांती ने कहा, महाराष्ट्र में उत्तर भारतीयों के प्रति राज ठाकरे की राजनीति अक्षम्य है और आज वह चाहते हैं कि इस अपराध काे भुलाकर उनका स्वागत किया जाय, यह असंभव है। राज का समर्थन करने वाले उन उत्तर भारतीयों का अपमान कर रहे हैं, जो घृणा और हिंसा की भेंट चढ़े।