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जाने कब बनेगा अयोघ्या में राम मंदिर, क्या आ रही रुकावट

अयोध्या: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अयोध्या में इस साल 5 अगस्त को राम मंदिर का भूमिपूजन किया था. लेकिन 138 दिन बाद भी मंदिर की नींव को लेकर हो रही लेट-लतीफी पर देश की प्रतिष्ठित भवन निर्माण संस्थाओं पर सवाल खड़े हो रहे हैं. अब 4 महीने बाद 161 फीट ऊंचे बनने वाले मंदिर की नींव की समीक्षा करने के बाद हाई एक्सपर्ट कमेटी सोमवार को अपनी रिपोर्ट मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र को सौंपेगी.

मंदिर के आर्किटेक्ट सीबी सोमपुरा के बेटे निखिल सोमपुरा ने कहा- मंदिर शास्त्र में परंपरागत तरीके से चूने और पत्थर से ही मंदिर की नींव तैयार की जाती है. कुछ मंदिरों में हमने आधुनिक पद्धति का भी प्रयोग किया है. जहां तक श्रीराम जन्मभूमि मंदिर की नींव की बात है तो उसकी नींव कैसी हो, इस पर बनी विशेषज्ञ कमेटी की रिपोर्ट का इंतजार है. क्योंकि, नींव तैयार करने वाली एजेंसी का मानना है कि जन्मस्थान की जमीन की वजन सहन करने की क्षमता कम है. सबके अपने-अपने विचार हैं। हम इसमें कुछ नहीं कर सकते.

उधर, मध्य प्रदेश के जबलपुर में बन रहे देश के सबसे बड़े 268 फीट ऊंचे जैन मंदिर के आर्किटेक्ट स्नेहिल पटेल ने कहा कि राम मंदिर की नींव में अड़चन के पीछे इसकी डिजाइन है.

पिलर्स की टेस्ट रिपोर्ट संतोषजनक नहीं

ट्रस्ट ने खंभों पर नींव तैयार करने के लिए शुरुआती तौर पर एलएंडटी को 29.5 करोड़ दिए हैं. एलएंडटी ने 14-15 सितंबर को टेस्टिंग के लिए दो स्थानों पर 10 टेस्ट पिलर तैयार किए हैं. एक मीटर मोटे 100 फीट गहरे इन पिलर्स को सीमेंट और कॉन्क्रीट से तैयार किया गया है. 28 दिन पकने के बाद इनकी टेस्टिंग विशेषज्ञों द्वारा की गई. लेकिन पिलर की टेस्ट रिपोर्ट संतोषजनक नहीं रही. इसके बाद मिट्टी को लेकर सवाल खड़े किए गए. ट्रस्ट ने मंदिर के निर्माण कार्य की निगरानी की जिम्मेदारी टाटा कंसल्टिंग इंजीनियरिंग (टीसीई) को दी है.

भूमिगत खंभों की रिपोर्ट ठीक न आने पर ट्रस्ट ने दिल्ली आईआईटी के पूर्व निदेशक वीएस राजू की अध्यक्षता में 8 सदस्यों की कमेटी बना दी. इसमें भूमिगत खंभों की डिजाइन बनाने वाले तीनों संस्थान के प्रतिनिधि भी हैं. कहा गया है कि राम जन्मभूमि की जमीन के नीचे जहरीले रसायनों वाली मिट्टी भी है.

कमेटी से इन 5 बिंदुओं पर मिलेगा जवाब

  • मिट्टी दुरुस्त है या नहीं।
  • मंदिर की भूकंप रोधी डिजाइन का मूल्यांकन सही है या नहीं।
  • मंदिर के डिजाइन को देश-विदेश में बने मंदिरों से अध्ययन करें।
  • प्रस्तावित नींव के तरीके का मूल्यांकन।
  • मिट्टी में जहरीले रसायनों की मौजूदगी का असर और भूकंप से बचाव के उपायों की समीक्षा। साथ ही भूमिगत पानी का असर।

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