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जानिए-भड़ली नवमी का शुभ मुहूर्त और महत्व

नई दिल्ली:- हिंदू पंचांग के अनुसार, आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को भड़ली नवमी के नाम से जानते हैं। इसे भडल्या नवमी, कंदर्प नवमी जैसे नामों से भी जाना जाता है। इस दिन भगवान विष्णु की विधिवत तरीके से पूजा करने का विधान है। माना जाता है कि भड़ली नवमी के दिन विवाह जैसे मांगलिक कार्य करना सबसे अधिक शुभ माना जाता है। मान्यता है कि जिन लोगों के विवाह का मुहूर्त नहीं निकल रहा है, तो वे लोग भड़ली नवमी के दिन बिना किसी चिंता के शादी कर सकते हैं। इस दिन शादी करने से किसी भी प्रकार का दोष नहीं लगता है
भड़ली नवमी तिथि और शुभ मुहूर्त

आषाढ़ शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि प्रारंभ – 07 जुलाई, गुरुवार को शाम 07 बजकर 28 मिनट से शुरू

आषाढ़ शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि समापन -08 जुलाई, शुक्रवार को शाम 06 बजकर 25 मिनट तक

उदया तिथि के अनुसार भड़ली नवमी 08 जुलाई को मनाई जाएगी।

भड़ली नवमी पर बन रहे हैं तीन शुभ योग
इस साल भड़ली नवमी पर शिव, सिद्ध और रवि योग बन रहे हैं। इस योग में मांगलिक और शुभ काम करना अच्छा माना जाता है।

शिव योग – 7 जुलाई को सुबह 10 बजकर 38 मिनट से 08 जुलाई सुबह 09 बजकर 01 मिनट तक

सिद्ध योग -8 जुलाई सुबह 09 बजकर 01 मिनट से 9 जुलाई सुबह 06 बजकर 48 मिनट तक।

भड़ली नवमी होता है अबूझ मुहूर्त
वेद-शास्त्रों के अनुसार भड़ली नवमी को अक्षय तृतीया की तरह की अबूझ माना जाता है। इस दिन बिना मुहूर्त देखे ही विवाह सहित अन्य मांगलिक कार्य हो सकते हैं। इसके साथ ही भड़ली नवमी के दिन खरीदारी, गृह प्रवेश या फिर नया कारोबार शुरू करने के लिए काफी अच्छा माना जाता है