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आरोप लगाने वाले नेता पहले जाकर पत्र का मजमून पढ़े और मकसद समझे: आनंद शर्मा

नई दिल्ली: कांग्रेस में लम्बे समय से चल रहा चिट्ठी विवाद थमने का नाम नही ले रहा है। सानिया गांधी की ख़राब सेहत के बीच पार्टी के 23 वरिष्ठ नेताओं ने पार्टी की खराब स्थिति पर चिंतन के लिए भेजे गए पत्र के समय को लेकर राहुल गांधी ने उन नेताओं पर सवाल उठाये थे। जिसपर गुरुवार को कांग्रेस सरकार में वाणिज्य और उद्योग मंत्री रहे आनंद शर्मा ने राहुल के सवालों को गैर वाजिब करार दिया है। शर्मा का दावा है कि सोनिया गांधी की सेहत की रोज खोज खबर लेने के बाद ही उन्‍हें यह पत्र भेजा गया और इस वजह से 15 दिनों तक इंतजार किया गया।

 23 अगस्‍त को हुई थी कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक

बीते 23 अगस्‍त को कांग्रेस की कार्यसमिति की बैठक हुए थी, बैठक में पार्टी की मौजूदा चिंतनीय स्थिति पर सवाल उठाने वाले इस पत्र को लेकर जबरदस्‍त बवाल हुआ था। पूर्व कांग्रेस अध्‍यक्ष रहे राहुल गांधी ने पत्र लिखने वाले नेताओं पर आरोप लगाते हुए कहा था कि यह पत्र ऐसे समय भेजा गया जब उनकी मां अस्‍पताल में सेहत की चुनौती का सामना कर रहीं थीं। राहुल ने इन नेताओं पर संवदेनशीलता नहीं बरतने का आरोप भी लगाया था। आनंद शर्मा ने एक मीडिया रिपोर्ट में कहा कि संवदेनशीलता नहीं बरतने की बात गलत है। पत्र लिखने वाले सभी नेता सोनिया गांधी के प्रति न केवल गहरी आस्‍था रखते हैं बल्कि उनकी सेहत की संवेदनशीलता का पूरा ख्‍याल रखा गया।

कैसे चला घटनाक्रम

चिट्ठी भेजे जाने के घटनाक्रम को समझाते हुए शर्मा ने कहा कि वास्‍तव में कांग्रेस के मौजूदा हालत पर आत्‍मचिंतन के लिए सोनिया गांधी को लिखा गया पत्र 23 जुलाई को ही तैयार हो गया था। इस पर हस्‍ताक्षर करने वाले सभी नेताओं ने पत्र के एक-एक शब्‍द को पढ़ा और पूरी तरह सहमति बनने के बाद केवल इसकी एक प्रति बनाई गई जिसे भेजने की जिम्‍मेदारी गुलाम नबी आजाद को सौंपी गई। इस बीच ही सोनिया गांधी की ओर से राज्‍यसभा के कांग्रेस सांसदों की 30 जुलाई की बैठक बुलाने की सूचना आ गई। तब पत्र लिखने वाले सभी नेताओं ने एक सुर में तय किया कि इस बैठक से पूर्व चिट्ठी भेजना उचित नहीं होगा।

शर्मा ने आगे कहा कि राज्‍यसभा सांसदों की बैठक के बाद उसी शाम सोनिया गांधी गंगाराम अस्‍पताल में अपने रूटीन चेक अप के लिए भर्त्‍ती हो गई्ं और पत्र नहीं भेजा गया। कांग्रेस अध्‍यक्ष 1 अगस्‍त को अस्‍पताल से वापस लौंटी। इसके बाद एक हफ्ते के दौरान गुलाम नबी आजाद ने खुद 10 जनपथ तीन बार फोन कर सोनिया गांधी की सेहत का अपडेट लिया और जब बताया गया कि सब ठीक है तब 7 अगस्‍त को पत्र भेजने का फैसला हुआ। शर्मा के अनुसार पत्र पर तारीख 7 अगस्‍त की जरूर डाली गई मगर चिट्ठी 8 अगस्‍त की शाम को कांग्रेस अध्‍यक्ष के यहां पहुंचाया गया।

रखा गया था सेहत की संवेदनशीलता का ध्यान

आनंद शर्मा ने कहा कि इससे साफ है कि सोनिया गांधी की सेहत की संवेदनशीलता और भावनाओं का पूरा ख्‍याल रखते हुए चिठठी भेजी गई। लेकिन कांग्रेस के सामने उपस्थित मौजूदा गंभीर चुनौतियों पर चर्चा के लिए उठाए गए मुददों से ध्‍यान बंटाने के अभियान के तहत चिट्ठी भेजने वाले नेताओं को सुनियोजित तरीके से कठघरे में खड़ा किया गया। शर्मा के अनुसार इस तरह का सवाल उठाने वाले तमाम पार्टी नेताओं ने पत्र का मजमून पढ़े और मकसद समझे बिना चिट्ठी लिखने वाले नेताओं को गद्दार तक घोषित कर डाला।

 

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