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प्रतापगढ़ के किसानों को आत्‍मनिर्भर बना रहें हैं आम और आंवला, जानिए कैसे?

प्रतापगढ़: ऐसा कहा जाता है कि मनुष्य तभी तक जीवित रह सकता है जब तक की दुनिया में पेड़ जीवित रहेंगे। पेड़ सदा लाभदायक ही होते हैं। पेड़ केवल पर्यावरण संतुलन ही नहीं, पेड़-पौधे आर्थिक मजबूती में भी सहायक होते हैं। इनसे कई तरह के लाभ होते हैं। प्रतापगढ़ में आंवला और आम के बाग को ही लीजिए, किसानों व उद्यमियों के लिए यह सब एक तरह से कमाऊ पूत जैसे ही हैं। यहां के सैकड़ों गांवों के किसान इससे खुद को आत्मनिर्भर बनाए हैं। यह बात अलग है कि उनको सरकारी योजना का उतना लाभ नहीं मिल पाता, जितना दूसरे प्रदेशों के किसानों को मिलता है।

आंवला के कुटीर उद्योग ने दिया किसानों को सहारा

वैसे तो प्रतापगढ़ जिला उद्योग विहीन है, पर आंवला ने कुटीर उद्योग की लाज बचा रखी है। सदर क्षेत्र के गोड़े व चिलबिला क्षेत्र में बड़े पैमाने पर रोपे गए अच्छे पौधे यानि अमृतफल आंवला किसानों को सहारा दे रहे हैं। सीजन में वह कमाई कराते हैं। कई किसान उद्यमी भी हैं। वह आंवला के विविध उत्पाद बनाकर बेचते हैं।

कुंडा व लालगंज क्षेत्र में आम के बाग

वहीं प्रतापगढ़ के कुंडा व लालगंज क्षेत्र में आम के बाग नजर आते हैं। किसान व आम ग्रामीण का साबुत फल, खटाई, लकड़ी बेचकर कमाते हैं। कुंडा के मानिकपुर इलाके में दूर से ही दीपक सोनकर, बबलू, नीरज द्विवेदी आदि के बाग दिखते हैं। यह लोग आम के बड़े सप्लायर हैं। कई के पास अपने बाग हैं और तमाम लोग सीजन में बाग खरीद लेते हैं। इस तरह आम के बाग कमाई के खास माध्यम बने हैं। आम के साथ ही महुए की फली से तेल निकलता है। नीम की खली बिकती है। उसका तेल बिकता है।

क्षेत्र के डीएफओ बीआर अहीरवार बताते हैं कि पेड़ हर तरह से फायदा देते हैं। फल, आक्सीजन, छाया, सूखने पर लकड़ी देते हैं। वर्षा कराने में सहायक होते हैं। अपने जिले में पेड़-पौधे आर्थिक मजबूती के आधार भी बने हैं। इसको देखते हुए विभाग वन महोत्सव में अच्छे पौधे रोपने पर जोर दिया जा रहा है। आम, नीम, पीपल, शीशम, सागौन, अमरूद, जामुन, खैर को बढ़ावा देने के पीछे यही मकसद है कि पेड़ पर्यावरण संरक्षण के साथ चार पैसे कमाकर दें।

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