Thursday , June 30 2022
कई देशों में फैला Monkeypox, समलैंगिकों को सबसे ज्यादा खतरा
कई देशों में फैला Monkeypox, समलैंगिकों को सबसे ज्यादा खतरा

कई देशों में फैला Monkeypox, समलैंगिकों को सबसे ज्यादा खतरा

नई दिल्ली। जब से कोरोना महामारी फैली है, लोगों में नई बीमारियों को लेकर खौफ सा पैदा हो गया है। दुनिया में कहीं भी रहस्यमय या कई देशों में एक ही बीमारी के फैलने की खबर आती है तो भारतीय टेंशन में आ जाते हैं। ऐसी ही एक बीमारी को लेकर दुनिया के कई देशों में अलर्ट जारी हो गया है। ब्रिटेन समेत यूरोप के कई देशों के बाद मंकीपॉक्स ने अमेरिका को भी अलर्ट भी कर दिया है। अबतक इस बीमारी को मध्य और पश्चिमी अफ्रीका के कुछ इलाकों में एंडेमिक बीमारी के तौर पर माना जा रहा था। यानी यह बीमारी कुछ इलाकों में सीमित होकर रह गई थी। लेकिन अब अमेरिका में मंकीपॉक्स के पहले केस की पुष्टि हुई है। आइए समझते हैं कि Monkeypox भारत और भारतीयों के लिए कितनी चिंता की बात है?
मई के पहले हफ्ते से ही यूरोप और उत्तरी अमेरिका के कई देशों में मंकीपॉक्स के मामलों की पुष्टि हो चुकी है या दर्जनों संदिग्ध मामलों की जांच की जा रही है। मंकीपॉक्स के मामले बढ़ने के कारण स्पेन, पुर्तगाल, यूके और कनाडा में अलर्ट जारी किया गया है।
मंकीपॉक्स एक से दूसरे में फैलने वाली वायरल बीमारी है। इसे चेचक जैसा माना जा सकता है। यह स्मॉलपॉक्स का एनिमल कजिन होता है। वैसे चेचक के समाप्त होने की घोषणा 1980 में ही कर दी गई थी।
मंकीपॉक्स के लक्षण की बात करें तो शरीर में खुजली, स्किन पर पानी से भरे चकत्ते, त्वचा पर दाने हो सकते हैं। यह रोगी के ठीक होने के बाद भी निशान छोड़ सकता है। बुखार, सिरदर्द, शरीर में दर्द, सूजन, कंपकंपी, थकावट जैसे सामान्य लक्षण दिखाई दे सकते हैं।
जंगली जीवों के बॉडी फ्लूअड या कच्चे या कम पके मांस खाने से मंकीपॉक्स फैल सकता है। संक्रमित जानवर के काटने से भी मंकीपॉक्स हो सकता है। चूहे, गिलहरी जैसे कुतरने वाले जानवर भी यह बीमारी फैला सकते हैं। व्यक्ति के संक्रमित होने के पांच से 21 दिनों के भीतर लक्षण दिखाई देने लग सकते हैं।
महामारी जैसी स्थिति की निगरानी कर रहे विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा है कि हम पुरुषों के साथ सेक्स करने वाले पुरुषों में भी संक्रमण देख रहे हैं। लेकिन अमेरिकी हेल्थ एजेंसी CDC ने कहा कि सेक्शुअल ओरिएंटेशन से इतर कोई भी मंकीपॉक्स घावों या साझा किए कपड़ों, बिस्तरों, बॉडी फ्लूअड से यह बीमारी फैला सकता है।
मंकीपॉक्स से हल्के लक्षण दिखाई देते हैं लेकिन बेहद खराब स्वास्थ्य प्रणाली वाले अफ्रीकी क्षेत्रों में मृत्यु दर लगभग 10 प्रतिशत है। मंकीपॉक्स पहली बार 1958 में बंदरों में पता चला था। इंसानों में पहला मामला 1970 में आया था। भारत में मंकीपॉक्स का कोई मामला नहीं आया है लेकिन विदेश आने जाने वाले लोगों को थोड़ा सतर्क रहने की जरूरत है।
मंकीपॉक्स के मामलों की पुष्टि होने के बीच यूके की स्वास्थ्य सुरक्षा एजेंसी ने समलैंगिक और बायसेक्सुअल पुरुषों को असामान्य चकत्तों/घावों को लेकर आगाह किया है। एजेंसी ने ऐसे चकत्तों वाले लोगों को बिना कोई देरी किए सेक्सुअल हेल्थ सर्विस से संपर्क करने को कहा है। मंकीपॉक्स को पहले यौन संक्रमण के रूप में सूचीबद्ध नहीं किया गया था।