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Mumbai: एक बार फिर सवालों के घेरे में Sion Hospital

मुंबई। जहां एक तरफ कोरोना वायरस है जो लोगों को अपनी आगोश में ले रहा है वही दुसरी तरफ भगवान का रूप कहे जाने वाले डाक्टर व अस्पातल वाले है जो लोगों के जीवन बचाने के बजाए इनके साथ खिलवाड कर रहे है ।  सोशल मीडिया पर लगातार सुर्खियों रहने वाला मुंबई का सायन अस्पताल, जहां मरीजो के साथ खिलवाड हो रहा है।

यहां कुछ दिन पहले कोरोना के मरीजों के मामले में एक बड़ी लापरवाही सामने आई थी। सोशल मीडिया में एक वीडियो वायरल हुआ था। वायरल वीडियो में दिख रहा है कि अस्पताल के वॉर्ड में कई मरीज बेड पर लेटे हैं। मरीजों के बीच में काले प्लास्टिक के बैगों में कोरोना से जान गंवाने वाले लोगों के शव भी बेड पर रखे हैं। कुछ शवों को कपड़ों से तो कुछ को कंबल से ढका गया है। बताया जा रहा है कि वॉर्ड में मरीजों के बीच ऐसे 19 शव रखे गए थे।

दो कर्मचारियों को निलंबित

वही आज सायन अस्पताल एक बार फिर सुर्खियो में बना हुआ है। दरअसल अस्पताल में डॉक्टरों की बड़ी लापरवाही देखने को मिली है। अस्पताल में शवों की अदला-बदली कर दी गई. आरोप है कि एक शव को गलती से दूसरे परिवार को दे दिया गया, जिसका अंतिम संस्कार भी हो गया. बाद में पता चलने पर पीड़ित परिजनों ने अस्पताल में हंगामा किया तो आनन फानन में अस्पताल प्रशासन ने दो कर्मचारियों को सस्पेंड कर मामले की जांच शुरू कर दी।

जानकारी के मुताबिक 27 साल के अंकुश का 28 अगस्त को एक्सीडेंट हो गया था। जिसके बाद उसे गंभीर हालत में अस्पताल में सरकारी लोकमान्य तिलक अस्पताल में भर्ती कराया गया।इस अस्पताल को सायन अस्पताल भी कहा जाता है. अंकुश की 13 सितंबर की सुबह मौत हो गई। अस्पताल प्रशासन ने इसकी जानकारी उसके परिवार वालों को दी. साथ ही शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया।

अस्पताल में डॉक्टरों की लापरवाही

अंकुश के परिवार वाले उसका शव लेने के लिए इंतजार कर रहे थे। इसी बीच वहां पर दिगंबर नाम के युवक के शव का भी पोस्टमार्टम चल रहा था। दिगंबर ने कुछ समय पहले आत्महत्या की थी. पोस्टमार्टम के बाद अस्पताल प्रशासन ने दिगंबर के परिवार वालों को बुलाया और शव उनके सुपुर्द कर दिया। लेकिन वह शव दिगंबर का नहीं बल्कि अंकुश का था. जवान बेटे की मौत से बुरी तरह आहत परिवार ने शव को ध्यान से देखे बिना ही उसका अंतिम संस्कार कर दिया।

कुछ देर बाद जब अंकुश के परिजनों को शव लेने के लिए बुलाया गया तो पता चला कि वहां अंकुश की जगह किसी और का शव था, जिसे अंकुश के परिजनों ने लेने से मना कर दिया. इसके बाद अंकुश के परिजनों ने अस्पताल में हंगामा शरू कर दिया, जिसके बाद मामला पुलिस स्टेशन तक पहुंच गया। फिलहाल अस्पताल प्रशासन ने लापरवाही के आरोप में दो कर्मचारियों को निलंबित कर मामले की जांच के लिए एक कमेटी बना दी है. वहीं अंकुश के परिजनों की शिकायत पर पुलिस भी मामले की जांच कर रही है।

 

 

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