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कनाडा के PM का किसान आंदोलन पर बोलना पड़ा भारी, भारत ने ऐसे दिया जवाब

नई दिल्ली। देश में किसानों का आंदोलन थमने का नाम नही ले रहा सरकार के सारे प्रयास इस आंदोलन को रोकने में विफल रहे है। किसान बिल को लेकर कितनी बार सरकार ने किसानों से बातचीत की। लेकिन इसका कोई सकारात्मक समाधान नही निकला। इस आंदोलन का समर्थन करने में जहां राजनेता और बॉलीवुड कुद पड़ा वहीं अब कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो भी इस आंदोलन में किसानों के पक्ष में आ गये है।

उन्होंने कहा कि ‘लिबरल पार्टी के मतादाताओं के एक हिस्से को खुश करने के लिए भारत के आंतरिक मामलों में इस तरह का स्पष्ट हस्तक्षेप पूरी तरह से अस्वीकार्य है। इससे द्विपक्षीय संबंधों पर असर पड़ेगा।’

ट्रूडो के किसान आंदोलन के समर्थन में बयान पर भारत सरकार की तरफ से पहले ही कड़ी आपत्ति जताई जा चुकी है। वहीं अब भारत के 22 पूर्व राजनयिकों ने चिट्ठी लिखकर उनके बयानों की आलोचना की है। इन राजनायिकों में कनाडा में भारत के राजनायिक रहे विष्णु प्रकाश भी शामिल हैं। राजनायिकों ने उनके बयान इस बयान को ‘कनाडा में वोट बैंक पॉलिटिक्स’ करार दिया है।

उन्होंने कहा कि ‘कनाडा में खालिस्तानी तत्व कई प्रमुख गुरुद्वारों को नियंत्रित करते हैं, जो उन्हें पर्याप्त धन की फंडिंग करते हैं। जिनका कथित तौर पर राजनीतिक पार्टियों के चुनावी कैंपेन में भी खर्च किया जाता है। खासकर लिबरल पार्टियों के। वो नियमित रूप से प्रदर्शनों, रैलियों और अन्य कार्यक्रमों में भाग लेते हैं जहां भारत विरोधी नारे लगाए जाते हैं और आतंकवादियों को उकसाया जाता है। कुछ कनाडाई राजनेता इन आयोजनों में भाग लेते हैं और अलगाववादियों को प्रचार को शक्ति प्रदान करते हैं। पाकिस्तानी ‘राजनयिक’ ऐसे खालिस्तानी कार्यक्रमों में विशिष्ट रूप से भाग लेते हैं। लेकिन कनाडा के अधिकारी इस पर ध्यान नहीं देते हैं।

 

 

 

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