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राजमार्गों की तरह होनी चाहिए ग्रामीण सड़कों की गुणवत्ता

नयी दिल्ली। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) के तहत निर्मित सड़कों को ‘‘गांवों की जीवनरेखा’’ करार देते हुए केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री गिरिराज सिंह ने मंगलवार को कहा कि ग्रामीण सड़कों की गुणवत्ता राष्ट्रीय राजमार्गों (एनएच) के जैसी होनी चाहिए। ‘ग्रामीण सड़कों में नई प्रौद्योगिकी और नवाचार’ पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए सिंह ने हरित प्रौद्योगिकियों के उपयोग की वकालत की, जिसमें विशेष रूप से कचरे का इस्तेमाल किया गया हो। उन्होंने कहा कि यह सड़क निर्माण को पर्यावरण हितैषी बनाता है। ग्रामीण सड़कों के निर्माण में नई प्रौद्योगिकियों-जैसे पूर्ण गहराई भूमि-सुधार, सीमेंट उपचारित उप आधार, नैनो प्रौद्योगिकियों और अन्य- का उपयोग किया जा रहा है। इन प्रौद्योगिकियों से लागत में 10 से 15 प्रतिशत प्रति किलोमीटर की कमी लाने में मदद मिलती है। 

केंद्रीय पंचायती राज मंत्री सिंह ने कहा, “साथ ही हमें यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि ग्रामीण सड़कों की गुणवत्ता राष्ट्रीय राजमार्गों के समान हो। ये सड़कें हमारे गांवों की जीवन रेखा हैं।” केंद्रीय पंचायती राज राज्य मंत्री कपिल मोरेश्वर पाटिल ने भी कहा कि ग्रामीण सड़कों पर यात्रा करना उतना ही आरामदेह होना चाहिए जितना कि राष्ट्रीय राजमार्गों पर होता है ताकि जब यात्री राजमार्गों से ग्रामीण सड़कों पर जाएं तो उन्हें कोई अंतर महसूस न हो। ग्रामीण विकास विभाग के सचिव नागेंद्र नाथ सिन्हा ने कहा कि कई अध्ययनों में यह सामने आया है कि ग्रामीण क्षेत्रों के विकास के लिए ग्रामीण सड़कों के निर्माण पर बहुत कम लागत आती है और इन सड़कों के निर्माण से रोजगार सृजन भी होता है।