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Bihar election:तेजस्वी से तंग रघुवंश प्रसाद सिंह ने भेजा लालू को इस्तीफ़ा

पटना: जैसे-जैसे बिहार में विधानसभा चुनाव पास आते जा रहें हैं। वैसे-वैसे बिहार की राजनीति में गरमाहट को मेहसूस किया जाने लगा है। एक तरफ जहां बिहार के सीएम नीतीश कुमार अपनी सत्ता बचाने में लगे हुए है तो वहीं उनकी चिर प्रतिद्वंद्वी मानी जा रही आरजेडी नीतीश के हर दांव का जवाब देने में लगी हुई है। लेकिन गुरुवार को आरजेडी को बड़ा झटका लगा है। कद्दावर नेता रघुवंश प्रसाद सिंह ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। रघुवंश 32 साल से पार्टी से जुड़े थे और लालू के बेहद करीबी नेताओं में माने जाते हैं। लालू यादव के चारा घोटाला में जेल जाने के बाद से पार्टी की कमान तेजस्वी के हाथ में है। रघुवंश तेजस्वी के कुछ फैसलों और रामा सिंह को राजद में शामिल कराए जाने की कोशिश से नाराज थे।

दिल्ली एम्स में भर्ती है रघुवंश प्रसाद

रघुवंश प्रसाद (74) अभी दिल्ली एम्स के आईसीयू में भर्ती हैं। वे अपने फेफड़े की बीमारी का इलाज करा रहे हैं। उन्होंने अस्पताल के बेड से ही राजद प्रमुख लालू यादव को इस्तीफा भेज दिया है। अपने इस्तीफे में उन्होंने लिखा, “जन नायक कर्पूरी ठाकुर के निधन के बाद 32 साल तक आपके पीठ पीछे खड़ा रहा, लेकिन अब नहीं। पार्टी, नेता, कार्यकर्ता और आमजन का बड़ा स्नेह मिला, मुझे क्षमा करें।”

इस वजह से दिया रघुवंश प्रसाद सिंह इस्तीफ़ा

तेजस्वी अपने विधानसभा सीट राघोपुर से जीत पक्की करने के लिए वैशाली के बाहुबली नेता रामा सिंह को राजद में शामिल कराना चाहते थे। रामा सिंह मीडिया के सामने इसकी पुष्टि कर चुके थे। इसके बाद रघुवंश प्रसाद ने 23 जून को पार्टी के उपाध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था, लेकिन लालू ने इसे मंजूर नहीं किया था।

लालू ने रघुवंश को मनाने के लिए तेजस्वी को दिल्ली भेजा था, लेकिन वे नहीं माने। रघुवंश और रामा वैशाली जिले से आते हैं। दोनों के बीच राजनीतिक टकराव रहा है। लोकसभा चुनाव में रघुवंश को रामा सिंह के हाथों हार का सामना भी करना पड़ा था।

1977 में पहली बार विधायक बने थे रघुवंश प्रसाद

रघुवंश प्रसाद 1977 में पहली बार विधायक बने थे, 5 बार सांसद चुने गए 1973-1977: संयुक्त सोसलिस्ट पार्टी से जुड़े 1977: संयुक्त सोसलिस्ट पार्टी के टिकट से बेलसंड विधानसभा सीट से चुनाव जीतकर पहली बार विधायक बने 1977-1979: बिहार सरकार में बिजली राज्य मंत्री बने 1980-1985: लोक दल के सीतामढ़ी के प्रेसिडेंट बने 1985-1989: लोक दल के पार्लियामेंट्री बोर्ड के सदस्य बने।

1990-1994: एमएलसी और बिहार विधान परिषद के डिप्टी स्पीकर बने 1995-1996: बिहार सरकार में ऊर्जा और आपदा प्रबंधन विभाग के मंत्री बने 1996: वैशाली सीट से पहली बार लोकसभा का चुनाव जीता, केंद्रीय पशुपालन राज्यमंत्री बने 1997-1998: खाद्य एवं उपभोक्ता मामले के केंद्रीय मंत्री बने 1998: वैशाली सीट से सांसद चुने गए 1999: वैशाली सीट से सांसद चुने गए 1999-2000: लोकसभा में राजद के नेता रहे 1999-2004: सांसद रहे 2004: चौथी बार वैशाली से लोकसभा का चुनाव जीते, केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री बने 2009: पांचवी बार लोकसभा का चुनाव जीते

 

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