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सामना में शिवसेना ने की जया बच्चन की तारीफ कहा बेबाकी से कही अपनी बात

 मुंबई: शिवसेना ने अपने मुखपत्र सामना में फिल्म अभिनेत्री और राज्यसभा सदस्य जया बच्चन की तारीफ की है। जया बच्चन ने कल संसद के मानसून सत्र में बोलते हुए कहा कि मौजूदा समय में बॉलीवुड को बदनाम किया जा रहा है सामना में लिखा है कि हिंदुस्थान का सिनेजगत पवित्र गंगा की तरह निर्मल है, ऐसा दावा कोई नहीं करेगा।लेकिन जैसा कि कुछ टीनपाट कलाकार दावा करते हैं कि सिनेजगत ‘गटर’ है, ऐसा भी नहीं कहा जा सकता।

श्रीमती जया बच्चन ने संसद में इसी पीड़ा को व्यक्त किया है। ‘जिन लोगों ने सिनेमा जगत से नाम-पैसा सब कुछ कमाया। वे अब इस क्षेत्र को गटर की उपमा दे रहे हैं। मैं इससे सहमत नहीं हूं।’

श्रीमती जया बच्चन के ये विचार जितने महत्वपूर्ण हैं, उतने ही बेबाक भी हैं। ये लोग जिस थाली में खाते हैं, उसी में छेद करते हैं। ऐसे लोगों पर जया बच्चन ने हमला किया है। श्रीमती बच्चन सच बोलने और अपनी बेबाकी के लिए प्रसिद्ध हैं। उन्होंने अपने राजनीतिक और सामाजिक विचारों को कभी छुपाकर नहीं रखा।

राज्यसभा में बेबाकी से कही अपनी बात

सामना ने आगे लिखा है कि जया बच्चन ने महिलाओं पर अत्याचार के संदर्भ में संसद में बहुत भावुक होकर आवाज उठाई है। ऐसे वक्त जब सिनेजगत की बदनामी और धुलाई शुरू है, अक्सर तांडव करनेवाले अच्छे-खासे पांडव भी जुबान बंद किए बैठे हुए हैं। मानो वे किसी अज्ञात आतंकवाद के साए में जी रहे हैं और कोई उन्हें उनके व्यवहार और बोलने के लिए परदे के पीछे से नियंत्रित कर रहा है।

परदे पर वीरता और लड़ाकू भूमिका निभाकर वाहवाही प्राप्त करने वाले हर तरह के कलाकार मन और विचारों पर ताला लगाकर पड़े हुए हैं। ऐसे में श्रीमती बच्चन की बिजली कड़कड़ाई है। मनोरंजन उद्योग रोज पांच लाख लोगों को रोजगार देता है।

फिलहाल अर्थव्यवस्था उद्ध्वस्त हो चुकी है और जब ‘लाइट, कैमरा, एक्शन’ बंद है, लोगों का ध्यान मुख्य मुद्दों से हटाने के लिए हमें (मतलब बॉलीवुड को) सोशल मीडिया पर बदनाम किया जा रहा है। ऐसा जया बच्चन ने कहा है। कुछ अभिनेता-अभिनेत्रियां ही पूरा बॉलीवुड नहीं है। लेकिन उनमें से कुछ लोग जो अनियंत्रित वक्तव्य दे रहे हैं, यह सब घृणास्पद है।

सामना ने की बॉलीवुड कलाकारों की तारीफ़

शिवसेना ने अपने मुखपत्र सामना में फ़िल्मी कलाकारों की तारीफ़ करते हुए कहा कि बॉक्स ऑफिस को हमेशा चलायमान रखने के लिए आमिर, शाहरुख और सलमान जैसे ‘खान’ लोगों की भी मदद हुई ही है। ये सारे लोग सिर्फ गटर में लेटते थे और ड्रग्स लेते थे, ऐसा दावा कोई कर रहा होगा तो ऐसी बकवास करनेवालों का मुंह पहले सूंघना चाहिए। खुद गंदगी खाकर दूसरों के मुंह को गंदा बताने का काम चल रहा है।

इस विकृति पर ही जया बच्चन ने हमला किया है। हमारे सिनेमा के कलाकार सामाजिक दायित्व को भी पूरा करते रहते हैं। युद्ध के दौरान सुनील दत्त और उनके सहयोगी सीमा पर जाकर सैनिकों का मनोरंजन करते थे।

मनोज कुमार ने हमेशा ‘राष्ट्रीय’ भावना से ही फिल्में बनाईं । कई कलाकार संकट के समय अपनी जेब से मदद करते रहते हैं। राज कपूर की हर फिल्म में सामाजिक दृष्टिकोण और समाजवाद की चिंगारी दिखती थी। आमिर खान की फिल्में भी उसी तरह की हैं। ये सारे लोग नशे में धुत्त होकर यह राष्ट्रीय कार्य कर रहे हैं।

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