भूलने की बीमारी पर खास रिपोर्ट: भारत में 40 लाख से ज्यादा डिमेंशिया के मरीज, इस उम्र में दिखतें है लक्षण

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लखनऊ: डिमेंशिया एक तरह का सिंड्रोम है, जिससे जूझ रहे व्यक्ति की सोचने, समझने की शक्ति कम हो जाती है. डिमेंशिया के कई प्रकार होते हैं, लेकिन इसका सबसे आम प्रकार अल्जाइमर्स रोग है. अल्जाइमर्स एसोसिएशन की वेबसाइट के मुताबिक, भारत में 40 लाख से ज्यादा लोगों को किसी न किसी तरह का डिमेंशिया है. दुनिया में यह आंकड़ा करीब 5 करोड़ है. आज विश्व अल्जाइमर्स दिवस है यानी इस बीमारी को लेकर जागरूकता का दिन. आइए जानते हैं इस बीमारी के बारे में.

अल्जाइमर्स रोग एक तरह का डिमेंशिया है, जो 60 साल की उम्र के बाद व्यक्ति को अपना शिकार बना सकता है. अल्जाइमर्स रोग का सबसे बड़ा जोखिम बढ़ती उम्र ही है इस बीमारी का जोखिम उम्र के साथ बढ़ता जाता है. ऐसा नहीं है कि युवा अल्जाइमर्स का शिकार नहीं होते, लेकिन आमतौर पर ऐसा कम ही होता है.

शुरुआती लक्षण

अल्जाइमर्स रोग के कारण हम हमारे रोज के काम भी ठीक से नहीं कर पाते हैं. इस बीमारी से जूझ रहे मरीजों को चीजों को याद रखना, गणना करना, दूसरों से संपर्क बनाए रखना मुश्किल हो जाता है. इस रोग के शुरुआती 10 लक्षण या संकेत ये हो सकते हैं.

मेमोरी लॉस: अल्जाइमर्स रोग का सबसे आम लक्षण है याददाश्त का कम होना. खासतौर से शुरुआती स्टेज में. अगर व्यक्ति हाल में जानी हुई चीजों को तुरंत भूल जाता है तो यह शुरुआती लक्षण हो सकते हैं.

प्रॉब्लम सॉल्व करने में मुश्किल

डिमेंशिया से जूझ रहे लोग किसी प्लान को बनाने या उसे मानने में परेशानी महसूस कर सकते हैं. इसके अलावा नंबरों के साथ काम करने में भी इन्हें परेशानी होती है. लोगों को कोई रेसिपी या मासिक बिल याद रखने में मुश्किल हो सकती है. इसके अलावा उनको ऐसे काम करने में काफी समय लगता है, जिन्हें वे बड़ी आसानी से कर लेते थे.

आसान चीजों को भूलना

अल्जाइमर्स पीड़ित व्यक्ति रोज के काम में शामिल आसान चीजों को भी पूरा करने में दिक्कत का सामना करता है. जैसे उन्हें अपने पसंदीदा खेलों के नियम याद नहीं रहते या किराना लिस्ट नहीं बना पाते.

जगह या समय के साथ कंफ्यूजन होना

लोगों को समय और जगह का ध्यान नहीं रहता है. उन्हें हाल ही में हुई किसी चीज को समझने में वक्त लगता है. इसके अलावा कई बार उन्हें यह भी पता नहीं चल पाता कि वे कहां हैं और वहां तक पहुंचे कैसे.

चित्रों, रंगों और संतुलन में दिक्कत

मरीज को नजर की भी परेशानी हो सकती है. हो सकता है कि वे किसी चीज का संतुलन बनाने और पढ़ने में परेशानी महसूस करें. इसके साथ ही हो सकता है कि वे दूरी और रंग का भी पता न कर पाएं.

रोग के जोखिम के बारे में जानते हैं

सीडीसी के मुताबिक, वैज्ञानिक अभी तक अल्जाइमर्स रोग के कारण का सटीक पता नहीं लगा पाए हैं. हालांकि, इस बीमारी में उम्र को ही सबसे बड़ा जोखिम माना जाता है. शोधकर्ता इस बात का पता लगा रहे हैं कि पढ़ाई, खाना और वातावरण का भी असर अल्जाइमर्स बीमारी के बढ़ने पर पड़ता है या नहीं. अल्जाइमर्स एसोसिएशन के मुताबिक, ये कुछ फैक्टर्स बीमारी का जोखिम बढ़ा सकते हैं.

अल्जाइमर्स रोग की तीन स्टेज

शुरुआती स्टेज (हल्का): अल्जाइमर्स की शुरुआती स्टेज में व्यक्ति सारे काम करता है. जैसे- ड्राइविंग करना, काम करना और सोशल एक्टिविटीज में शामिल होना इसके बावजूद व्यक्ति को ऐसा महसूस हो सकता है कि वो कुछ भूल रहा है. जैसे- शब्द, जगह. इस स्टेज में लक्षण एकदम नजर नहीं आते, लेकिन परिवार और दोस्त बदलाव को नोटिस कर सकते हैं. इसके अलावा डॉक्टर्स भी कुछ खास डायग्नोस्टिक टूल्स से लक्षणों का पता कर सकते हैं.

इस स्टेज में आम परेशानियां

गलत शब्द या नाम बोलना.
हाल ही में पढ़ी हुई किसी चीज को भूलना.
कीमती चीजों को खोना या गलत जगह पर रख देना.
प्लानिंग और ऑर्गेनाइज करने में परेशानी महसूस करना .

अल्जाइमर्स रोग का इलाज

सीडीसी के मुताबिक, फिलहाल अल्जाइमर्स रोग का कोई इलाज नहीं है. अल्जाइमर्स एसोसिएशन के अनुसार, कुछ लोगों के लिए दवाइयां अस्थाई रूप से डिमेंशिया के लक्षणों को ठीक कर सकती हैं. ये दवाइयां दिमाग में न्यूरो ट्रांसमीटर्स बढ़ा देती हैं. शोधकर्ता अल्जाइमर्स और दूसरे डिमेंशिया के बेहतर इलाज के लिए तरीकों की खोज में लगे हुए हैं.

करंट बायोलॉजी जर्नल में छपी एक स्टडी बताती है कि डिमेंशिया के इस खतरनाक प्रकार से बचने का अच्छा तरीका गहरी और ज्यादा नींद हो सकती है. इस स्टडी का नेतृत्व यूसी बार्कले के न्यूरो साइंटिस्ट मैथ्यू वॉकर और जोसेफ वीनर ने किया था.

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