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हलहारिणी अमावस्या पूजन से सूर्य देवता होते हैं प्रसन्न

हिंदू धर्म में हलहारिणी अमावस्या का विशेष महत्व बताया गया है। इस दिन किसान हल और खेती में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों की पूजा करते हैं और भगवान से अच्छी पैदावार के लिए प्रार्थना करते हैं। तो आइए हम आपको हलहारिणी अमावस्या के बारे में बताते हैं। 

इसे आषाण की अमावस्या भी कहा जाता है। आमतौर पर हलहारिणी अमावस्या तक बारिश की शुरुआत होने लगती है, खेतों की मिट्टी नई फसल के बीज बोने के लिए तैयार हो जाती है। इस वजह से आषाढ़ मास की अमावस्या के बाद खेती का काम शुरू हो जाता है। हल की पूजा करके खेत जोतने की शुरुआत होती है, इसके बाद बीज बोने का काम होता है।

जानें हलहारिणी अमावस्या के बारे में 

हिन्दू पंचांग के अनुसार आषाढ़ मास की अमावस्या को हलहारिणी अमावस्या कहते हैं। यह किसानों के लिए बहुत अधिक महत्व रखती है। इस दिन खेती नहीं की जाती है। हल और बैल की पूजा की जाती है। इस साल आषाढ़ महीने की अमावस्या तिथि दो दिन यानी 28 और 29 को रहेगी। अमावस्या के दिन पितरों के श्राद्ध कर्म और तर्पण के लिए हलहारिणी अमावस्या बहुत ही खास है। इस दिन पेड़ पौधे लगाने का भी महत्व है। कहा जाता है कि हलहारिणी अमावस्या पर बेल का पेड़ लगाना चाहिए। 

इस दिन यमुना, गंगा नदी में स्नान भी करना चाहिए। दरअसल 28 जून को श्राद्ध कर्म की अमावस्या और 29 जून को स्नान और दान की अमावस्या है। उदिया तिथि होने के कारण हलहारिणी अमावस्या 28 जून को और 29 जून दोनों दिन मनाई जा रही है। मंगलवार को अमावस्या तिथि होने के कारण इस संयोग में मंगल दोष निवारण के लिए पूजा की जा सकती है।

मानसिक सुख के लिए खास होता है हलहारिणी अमावस्या

हलहारिणी अमावस्या के दिन हल का पूजन किया जाता है। पंडितों का मानना है कि इसे मनाने का उद्देश्य किसी शुभ काम की शुरुआत से पहले भगवान को धन्यवाद देना है। इस दिन कुछ ऐसे काम किए जा सकते हैं जिनसे मानसिक सुख शांति के साथ पारिवारिक कष्ट भी दूर होंगे।

हलहारिणी अमावस्या का महत्व

ज्योतिष शास्त्र में हलहारिणी अमावस्या पर दान-स्नान और पितरों के श्राद्ध का विशेष महत्व बताया गया है। इस दिन धरती माता की भी पूजा की जाती है। साथ ही इस दिन किसान हल की भी पूजा करते हैं और नए पौधे लगाते हैं। वहीं इस दिन स्नान, पितृ तर्पण और अर्घ्य देने से पितृगण और सूर्यदेव भी प्रसन्न होते हैं।

हलहारिणी के दिन करें ये करें उपाय

आषाढ़ अमावस्‍या के दिन पवित्र नदी में स्‍नान जरूर करें। यदि ऐसा संभव न हो तो नहाने के पानी में पवित्र नदी का जल मिलाकर स्‍नान करें। अमावस्या तिथि के दिन दक्षिण दिशा की ओर मुख करके दिवंगत पितरों के लिए पितृ तर्पण करें। पंडितों का मानना है कि अमावस्या तिथि पर किसी भी तिथि पर गुजरे हुए पितरों के लिए पितरों के लिए तर्पण किया जा सकता है। इसके अलावा सुबह स्नान करने के बाद आटे की गोलियां बनाएं। उसके बाद किसी पास के तालाब या नदी के पास जाकर इन गोलियों को मछलियों को खिलाएं। मान्यता है कि ऐसा करने से आपके जीवन के सारे कष्ट दूर हो जाएंगे। इस दिन काली चींटियों को शक्कर मिला हुआ आटा खिलाएं। ऐसा करने से आपके पाप कर्म का क्षय होगा एवं मनोकामना पूरी होंगी। इस दिन अपने पितृों का नाम का ब्राह्मणों को भोजन कराएं। साथ ही उन्हें वस्त्र और दक्षिणा देकर विदा करें। अमावस्या के दिन भूखे लोगों को भोजन कराने का विशेष महत्व है। रात में काले कुत्ते को तेल लगी रोटी खिलाने से दुश्मन शांत हो जाएंगे। इस दिन रूद्राभिषेक  तथा शनि उपाय से कष्ट दूर होंगे। इस दिन कालसर्पनिवारण हेतु चांदी के नाग-नागिन की पूजा करें।