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ताइवान को लेकर बढ़ा चीन और अमेरिका के बीच तनाव, जानें क्या है वजह

नई दिल्ली: सामंतवादी देश चीन के साथ विश्व के कई देशों के रिश्ते लगातार खराब होते जा रहे हैं। एक तरफ चीन भारत के साथ सीमा को लेकर विवादों से घिरा है तो वहीं जापान और रशिया के साथ भी कुछ ऐसा ही हाल है। ऐसे में चीन अब इस फिराक में लगा हुआ है कि वो किसी देश पर हमला करके या किसी तरह की कूटनीति का इस्तेमाल करके कुछ ऐसा करें जिससे बाकी देशों पर वो अपना दबाव बनाने में कामयाब हो सके। कोरोना वायरस का फैलाव होने के बाद से दुनिया के बाकी देश चीन के खिलाफ खड़े हुए हैं। उसके बाद टिक टॉक और कई अन्य एप बंद किए जाने से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर किरकिरी हो रही है। ऐसे में चीन को काफी मुश्किलें झेलनी पड़ रही हैं।

भारत के बाद अमेरिका के साथ भी उलझते रिश्ते

अमेरिका के साथ भी रिश्ते उलझते जा रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप तो चीन से इतना नाराज है कि वो कई बार सार्वजनिक मंच पर कोरोना वायरस को चीनी वायरस तक कह चुके हैं। चीन के राष्ट्रपति शी जिनफिंग को ये बुरा भी लग चुका है, वो आपत्ति दर्ज करा चुके हैं मगर ट्रंप की नाराजगी इससे कहीं ऊपर है।

भारत से टकराने के बाद कई प्लेटफॉर्म पर नुकसान

भारत से टक्कर लेने के बाद चीन को कई प्लेटफॉर्म पर नुकसान हुआ है। इस बीच कई अन्य देश भी चीन के खिलाफ खड़े हो चुके हैं। इन्हीं में से एक देश ताइवान भी है। चीन का ताइवान को उसके खिलाफ बोलना या खड़े होना किसी तरह से पसंद नहीं है इस वजह से वो ताइवान पर जबरदस्त दबाव बना रहा है। ताइवान के विदेश मंत्रालय के अनुसार चीनी सेना पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के लड़ाकू विमानों ने पिछले नौ दिनों में 46 बार ताइवान की हवाई सीमा का उल्लंघन किया।

ताइवान ने चीन पर लगाए कई गंभीर आरोप

ताइवान ने इसे उकसाने और धमकाने की कार्रवाई बताते हुए दोनों देशों के बीच की सीमा निर्धारित करने वाली मीडियन लाइन का सम्मान करने की मांग के साथ ही ताइवान ने चीन पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं । इस पर चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने इस रेखा की वैधता पर ही सवाल उठा दिए और कहा कि ऐसी किसी रेखा का कोई महत्व नहीं है क्योंकि ताइवान चीन का अभिन्न हिस्सा है। चीन की हरकतों को देखते हुए अमेरिकी वायुसेना ताइवान के समर्थन में तैनात है। उधर ताइवान ने 14 से 18 सितंबर के बीच हान कुआंग युद्ध अभ्यास को जारी रखा और पिछले दिनों जमीन से हवा में मार करने वाली और एंटी शिप मिसाइलों के परीक्षण भी किया।

 

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