Wednesday , September 28 2022

ज्ञानवापी मस्जिद का फैसला अदालत पर छोड़ देना चाहिए

नई दिल्ली। केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने आज कहा कि ज्ञानवापी मस्जिद को लेकर चल रहे विवाद का फैसला अदालतों पर छोड़ देना चाहिए। उन्होंने दक्षिण अफ्रीका की नेल्सन मंडेला सरकार द्वारा बनाए गए ‘ट्रूथ कमीशन’ की तर्ज पर एक आयोग के गठन का सुझाव दिया। दक्षिण अफ्रीका में सदियों के रंगभेद शासन के दौरान हुए मानवाधिकारों के उल्लंघन की सच्चाई को उजागर करने के लिए ‘ट्रूथ कमीशन’ गठन किया गया था। उन्होंने कहा कि अतीत में की गई सभी ऐतिहासिक ज्यादतियों की जांच के लिए इस तरह के आयोग का गठन किया जा सकता है।

यहां दिन भर चले ‘इंडिया टीवी संवाद’ कॉन्क्लेव में सवालों के जवाब में खान ने याद किया कि कैसे पूर्व पीएम वीपी सिंह के शासन के दौरान अयोध्या में बाबरी मस्जिद विवाद के समाधान की कोशिशें अंतिम समय में नाकाम हो गई थीं। खान ने कहा, ‘यहां तक कि आडवाणी जी ने भी बिहार से इस कदम का समर्थन किया था। इस समझौते के तहत, तीन में से दो गुंबद हिंदुओं को दिए जाने थे और एक गुंबद मुसलमानों के पास रहने वाला था। एक ड्राफ्ट ऑर्डिनेंस भी तैयार कर लिया गया था, लेकिन कुछ लोग उन होटलों में गए जहां मुस्लिम नेता ठहरे हुए थे और उन्हें समझौते से पीछे हटने के लिए मजबूर किया।’

केरल के राज्यपाल ने खुलासा किया कि जब 1985 में अयोध्या में राम जन्मभूमि-बाबरी परिसर के ताले अदालत के आदेश पर फिर से खोले गए, तो वह ये कहने के लिए तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी के पास गए थे कि इससे भविष्य में गंभीर समस्या हो सकती है। खान ने दावा किया, राजीव गांधी ने तब उनसे कहा था कि ‘मैंने उन्हें (मुस्लिम नेताओं को) इमारत (बाबरी मस्जिद) का ताला खोले जाने के बारे में जानकारी दे दी थी।।’ खान ने कहा, उस समय ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के प्रमुख अली मियां ने बोर्ड को विवाद से बाहर रखा था, लेकिन राजीव गांधी की मृत्यु के बाद AIMPLB पीछे हट गया और विवाद को भड़काने के लिए बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी के साथ जाने का फैसला किया।

खान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ करते हुए कहा कि दुनिया के ज्यादातर विकसित देशों ने अब भारत की क्षमताओं को स्वीकार कर लिया है। उन्होंने कहा, ‘मोदी ने अतीत से चली आ रही हमारी गुलाम मानसिकता को तोड़ा है और मैं इसे उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि मानता हूं।’

केरल के राज्यपाल ने प्रधानमंत्री मोदी की 2 बड़ी उपलब्धियों का हवाला दिया: (1) ‘तीन तलाक’ प्रथा का उन्मूलन और (2) अनुच्छेद 370 को निरस्त करना। उन्होंने कहा, ‘इतिहास उन्हें एक राजनेता के रूप में याद रखेगा जिन्होंने ‘तीन तलाक’ को खत्म करके एक समाज सुधारक का काम किया। 2019 के बाद से, जब यह कानून बनाया गया था, मुस्लिम समुदाय में ‘तीन तलाक’ के मामलों में 90 फीसदी की गिरावट आई है। न केवल मुस्लिम महिलाओं, बल्कि उन मुस्लिम बच्चों के बारे में सोचिए, जिनकी जिंदगी में ‘तीन तलाक’ की वजह से उथल-पुथल हो जाती थी। यह कुप्रथा भारत में 13वीं शताब्दी से चली आ रही थी, जबकि तमाम मुस्लिम देशों ने इसे खत्म कर दिया था। एक बार जब मौजूदा राजनीतिक धूल हट जाएगी, तो लोगों को उस बड़े कदम का एहसास होगा जो उठाया गया है।

अनुच्छेद 370 को निरस्त करने को लेकर आरिफ मोहम्मद खान ने कहा: ‘हमारे संविधान में इस आर्टिकल की मौजूदगी ही कश्मीर में अलगाववादी मानसिकता को बढ़ावा देने के लिए काफी थी, और यह इस बात की स्वीकृति थी कि कश्मीर का फैसला अभी अंतिम नहीं है। अनुच्छेद 370 के कारण कश्मीर पर कानूनी तौर पर निगोसिएशन हो सकता था, लेकिन अब इसपर कोई चर्चा नहीं हो सकती। लेकिन अब, यह गैर-परक्राम्य हो गया है। कश्मीर भारत का अटूट अंग था, है और रहेगा।’