Friday , May 27 2022
ज्ञानवापी पर फैसला देने वाले जज को सता रही है अपनी सुरक्षा की चिंता
ज्ञानवापी पर फैसला देने वाले जज को सता रही है अपनी सुरक्षा की चिंता

ज्ञानवापी पर फैसला देने वाले जज को सता रही है अपनी सुरक्षा की चिंता

वाराणसी। ज्ञानवापी मस्जिद मामले में गुरुवार को कोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए सर्वे का आदेश दिया है। कोर्ट ने 17 मई तक सर्वे पूरा करने का आदेश दिया है। ज्ञानवापी पर फैसला देने वाले जज को अपनी सुरक्षा की चिंता सता रही है। जज दिवाकर ने कहा कि इस मामले को असाधारण मामला बनाकर भय का माहौल पैदा कर दिया गया है। डर इतना है कि मेरा परिवार हमेशा मेरी सुरक्षा को लेकर चिंतित रहता है।
जज ने फैसला सुनाते हुए कहा कि वह हमेशा अपनी सुरक्षा को लेकर चिंतित थे। डर का माहौल तैयार किया गया, इस सिविल केस को अलग तरह का केस बनाकर डर का माहौल तैयार किया गया। सिविल ज रवि कुमार दिवाकर ने कहा कि इतना डर है कि मेरा परिवार हमेशा मेरी सुरक्षा को लेकर चिंतित है और मैं अपने परिवार की सुरक्षा को लेकर चिंतित हूं। जब भी मैं घर से बाहर जाता मेरी पत्नी मेरी सुरक्षा को लेकर चिंतित रहती। बता दें कि इस हफ्ते कोर्ट इस पूरे मामले की सुनवाई कर रही थी, कोर्ट ने मस्जिद के भीतर वीडियोग्राफी की बात कही है। बता दें कि यह मस्जिद काशी विश्वनाथ मंदिर के बगल में है। मस्जिद मैनेजमेंट कमेटी ने सर्वे अधिकारी अजय कुमार मिश्रा पर भेदभाव का आरोप लगाया है। हालांकि कोर्ट ने उन्हें सर्वे करने वाली टीम से हटाने की अपील को खारिज कर दिया है, लेकिन कोर्ट ने दो नए अधिकारियों को इस टास्क को पूरा करने के लिए टीम में जोड़ा है। विशाल सिंह और अजय प्रताप सिंह को इसमे जोड़ा गया है।
अपना फैसला सुनाते हुए कोर्ट ने मस्जिद के नीचे बने दो बेसमेंट को सर्वे के लिए खोलने का इजाजत नहीं दिए जाने की अपील को भी खारिज कर दिया। पांच महिलाओं राखी सिंह, लक्ष्मी देवी, सीता साहू और अन्य ने इस पूरे मामले को लेकर कोर्ट में याचिका दायर की थी। इन महिलाओं ने मस्जिद के भीतर श्रंगार गौरी, भगवान गणेश, भगवान हनुमान और नंदी की पूजा हर रोज करने की इजाजत मांगी थी। इनका कहना है कि इनकी मूर्ति मस्जिद की बाहरी दीवार पर है। इन महिलाओं ने कोर्ट से यह निर्देश देने की अपील की थी इन मूर्तियों को तोड़ने नहीं दिया जाए। पिछले हफ्ते जब सर्वे करने के लिए टीम गई थी तो वीडियोग्राफी पर एक पक्ष ने आपत्ति जताई थी और इसके बाद दोनों ही पक्षों की ओर से नारेबाजी की गई थी।