Wednesday , August 10 2022
राष्ट्र प्रेम का संदेश दे रहा है प्रयागराज में अकबर के किले पर लहराता तिरंगा
राष्ट्र प्रेम का संदेश दे रहा है प्रयागराज में अकबर के किले पर लहराता तिरंगा

राष्ट्र प्रेम का संदेश दे रहा है प्रयागराज में अकबर के किले पर लहराता तिरंगा

प्रयागराज। तीर्थराज प्रयाग में संगम तट पर केवल धर्म ध्वजा ही नहीं लहराती हैं बल्कि राष्ट्र धर्म का प्रतीक राष्ट्र ध्वज तिरंगा भी यहां शान से लहराता है। करीब सौ फीट ऊंचा यह तिरंगा संगम में पुण्य की डुबकी लगाने आने वालों को किले की प्राचीर से राष्ट्रभक्ति का संदेश देता है। किले के नीचे से संगम स्नान के लिए जाने वाले श्रद्धालु भी गर्दन ऊंची कर तिरंगे को सम्मान देना नहीं भूलते हैं।

आठ साल से किले की शान बना है तिरंगा

संगम के एक छोर को छूते अकबर के किले पर यह तिरंगा आठ साल पहले वर्ष 2013 में फहराया गया था। फ्लैग फाउंडेशन ऑफ इंडिया की ओर से लेटे हनुमान मंदिर के पास किले की प्राचीर पर फहराया गया यह तिरंगा अपने आप में विशिष्ट है। तकरीबन दस फीट चौड़े और 15 फीट से ज्यादा लंबा यह झंडा सौ फीट ऊंचे खंभे पर किले की प्राचीर पर सदैव ही फहराता रहता है। कहते हैं कि काफी ऊंचाई पर लगा तिरंगा झंडा पांच किलोमीटर दूर से दिखाई देता है।

मनकामेश्वर मंदिर के प्रमुख पुजारी धरानंद के मुताबिक फ्लैग फाउंडेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष और हरियाणा के कुरुक्षेत्र से सांसद रहे नवीन जिंदल के सराहनीय प्रयास से किले पर यह अनूठा राष्ट्र ध्वज फहराया जा सका था। सैन्य और सिविल अफसरों की मौजूदगी में जिंदल ने ही झंडारोहण भी किया था। राष्ट्र ध्वज के प्रति आम लोगों में सम्मान का भाव जगाना इस ऐतिहासिक झंडारोहण का उद्देश्य था। उक्त मौके पर उन्होंने उपस्थित जनसमूह को राष्ट्रध्वज और राष्ट्रीय प्रतीकों का सम्मान करने के लिए प्रेरित भी किया था। तिरंगे को चौबीस घंटे फहराने की तय शर्तों की जानकारी भी दी थी।

स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं को राष्ट्रप्रेम सीखाता है तिरंगा

वर्ष 2013 में ध्वजारोहण कार्यक्रम में मौजूद कांग्रेस की राज्य कार्यकारिणी के सदस्य मुकुंद तिवारी ने बताया कि उस दौरान फ्लैग फाउंडेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष नवीन जिंदल ने बताया था कि देशभर के 45 महत्वपूर्ण स्थानों पर इस तरह के गगनचुंबी राष्ट्रध्वज फहराने की उनकी योजना है जिसमें प्रयागराज में फहराया गया तिरंगा 36वां था। तिरंगे को फहराने के तरीके भी उन्होंने बताए थे। कहा था कि तिरंगे को रात के वक्त भी रोशनी कर फहराया जा सकता है। तब से आज तक यह तिरंगा स्थानीय लोगों और संगम स्नान को आने वाले श्रद्धालुओं को राष्ट्रप्रेम सीखा रहा है।

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