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सिंडीकेट बनाकर फर्जी केस में फंसाती थी यूपी पुलिस, जानिए पूरा मामला

लखनऊ: बीते दिनों महोबा में क्रशर कारोबारी इंद्रकांत त्रिपाठी की संदिग्ध अवस्था में शव मिलने से पूरे सूबे में सनसनी मच गई थी क्योकि इंद्रकांत त्रिपाठी ने अपनी हत्या से पहले विडियो बनाकर महोबा के एसपी मणिलाल पाटीदार पर रिश्वत के लिए जान से मरे देने की धमकी मिलने की बात कही थी। महोबा में क्रशर कारोबारी इंद्रकांत त्रिपाठी की मौत हत्या भले न साबित हुई हो, लेकिन विशेष जांच दल (एसआइटी) जांच में तत्कालीन एसपी मणिलाल पाटीदार से लेकर अन्य पुलिसकर्मियों के सिंडीकेट बनाकर भ्रष्टाचार की फसल खड़ी करने का संगीन मामला सामने आया है।

पुलिस के इस सिंडीकेट पर एक-दो नहीं, बल्कि 10 से 12 तक ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें पुलिस ने बेकसूरों को झूठे मुकदमे में फंसाने का प्रयास किया। सूत्रों का कहना है कि आइजी वाराणसी विजय सिंह मीणा की अगुवाई में एसआइटी की पड़ताल में ऐसे कई गंभीर आरोपों की पुष्टि हुई है, जबकि कुछ शिकायतों में अभी और जांच की गुंजाइश है।

महोबा प्रकरण में जांच कर रही एसआइटी टीम ने किया खुलासा

महोबा प्रकरण की जांच के लिए गठित एसआइटी सिंडीकेट बनाकर भ्रष्टाचार किए जाने और लोगों को फर्जी मुकदमों में फंसाए जाने के षड्यंत्र का खुलासा किया, एसआइटी अपनी एक अलग जांच रिपोर्ट डीजीपी को सौंपेगी, जिसमें महोबा के तत्कालीन एसपी मणिलाल पाटीदार समेत करीब 40 पुलिसकर्मियों के विरुद्ध कठोर विभागीय कार्रवाई की संस्तुति किए जाने की तैयारी है। डीजीपी हितेश चंद्र अवस्थी के निर्देश पर महोबा गोलीकांड के लिए गठित एसआइटी को जांच के दौरान कई गंभीर तथ्य भी मिले हैं। ऐसी शिकायतों में निलंबित एसपी मणिलाल पाटीदार से लेकर सीओ, एसओ व अन्य पुलिसकर्मियों की भूमिका संदिग्ध है।

पुलिस ने फर्जी मुकदमों में फंसाने का किया षड्यंत्र

एसआइटी ने करीब 12 ऐसे पीड़ितों की शिकायतों का परीक्षण किया है, जिनमें हत्या के प्रयास से लेकर अन्य गंभीर धाराओं में फर्जी फंसाए जाने के आरोप हैं। जांच में पाया गया कि कई लोगों को पुलिस ने फर्जी मुकदमों में फंसाने का षड्यंत्र किया। भ्रष्टाचार में आकंठ डूबे पुलिस अधिकारी व कर्मी जल्द बेनकाब होंगे। आइजी विजय सिंह मीणा का कहना है कि एसआइटी ने अपनी जांच पूरी कर ली है। जल्द रिपार्ट डीजीपी मुख्यालय को सौंप दी जाएगी।

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