Tuesday , September 27 2022
VIDEO : एक पैर और हौसलों के पंख से शिक्षा की बेपनाह उड़ान भरती 10 साल की सीमा
VIDEO : एक पैर और हौसलों के पंख से शिक्षा की बेपनाह उड़ान भरती 10 साल की सीमा

VIDEO : एक पैर और हौसलों के पंख से शिक्षा की बेपनाह उड़ान भरती 10 साल की सीमा

पटना। मंजिल उन्हीं को मिलती है, जिनके सपनों में जान होती है, पंख से कुछ नहीं होता, हौसलों से उड़ान होती हैसोशल मीडिया पर इन दिनों 10 वर्षीय बच्ची का एक वीडियो वायरल हो रहा है। इस क्लिप में बच्ची स्कूल की ड्रेस पहने और बैग टांगे एक पैर पर कूदते हुए आगे बढ़ रही है। यह मामला बिहार के जमुई जिले का है। जहां सीमा नाम की यह दिव्यांग बच्ची स्कूल पहुंचने के लिए रोजाना 1 किलोमीटर का सफर कूदकर तय करती है। दरअसल, एक सड़क हादसे में मासूम का एक पैर खो दिया था। लेकिन बच्ची का जज्बा और हौसला देख इंटरनेट की पब्लिक उसे सैल्यूट कर रही है।
सीमा, स्कूल जाती और खूब मन लगाकर पढ़ती है। उसका सपना है कि वो पढ़-लिखकर एक शिक्षक बने, ताकि गरीबों को पढ़ाकर उनका जीवन बेहतर बना सके। वह खैरा प्रखंड के नक्सल प्रभावित इलाके फतेपुर गांव में अपने परिवार के साथ रहती है। बच्ची के पिता खिरन मांझी बिहार से बाहर मजदूरी कर परिवार के लिए रोजी-रोटी कमाते हैं। मां, बेबी देवी 6 बच्चों को संभालती है, जिनमें सीमा दूसरे नंबर पर है।
बिहार सरकार में मंत्री डॉ. अशोक चौधरी ने बिहार के मुख्यमंत्री नितिश कुमार को टैग करते हुए ट्विटर पर लिखा अब सीमा चलेगी भी और पढ़ेगी भी। जमुई जिलान्तर्गत खैरा प्रखंड के फतेहपुर गांव की रहने वाली मेधावी बच्ची सीमा के समुचित इलाज की जिम्मेदारी अब ‘महावीर चौधरी ट्रस्ट’ उठाएगा। ये मामला मंत्री श्री @sumit4chakai जी के विधानसभा क्षेत्र से जुड़ा है…।
बताया गया कि 2 साल पहले सड़क दुर्घटना में सीमा का एक पैर काटना पड़ा था। लेकिन सीमा का हौसला बहुत अटल है। वह बिना किसी मदद के हर दिन 1 किलोमीटर पगडंडी रास्ते पर कूदकर स्कूल जाती है। अब सोशल मीडिया पर लोग ना सिर्फ सीमा के जज्बे और हिम्मत को सलाम कर रहे हैं, बल्कि कुछ लोग मासूम की मदद के लिए भी आगे आ रहे हैं।
वहीँ, सोशल मीडिया पर सीमा का video वायरल होने के बाद जमुई के DM ने सीमा को ट्राइसिकल सौंपी।

वहीँ, सोनू सूद ने भी सीमा की मदद करते हुए Twitter पर लिखा, अब यह अपने एक नहीं दोनो पैरों पर क़ूद कर स्कूल जाएगी।
टिकट भेज रहा हूँ, चलिए दोनो पैरों पर चलने का समय आ गया।
अपने हौसले के कारण लोगों में चर्चा का विषय बन चुकी सीमा जमुई जिले के फतेहपुर गांव में सरकारी स्कूल में पढ़ती है। 10 साल की सीमा कक्षा चौथी की छात्रा है। परिवार की बात करें तो सीमा के माता-पिता दोनों ही अशिक्षित हैं। महादलित वर्ग से आने वाले सीमा के पिता खीरन मांझी बाहर मजदूरी करते हैं तो वहीं, मां बेबी देवी ईंट भट्टे पर काम करती हैं। यह जानकर आपको हैरानी होगी की सीमा एक पैर न होते हुए भी वह, रोज घर से स्कूल तक 500 मीटर का सफर पैदल ही तय करती है। सड़क न होने के बावजूद वह, पगडंडियों के सहारे अपने स्कूल पहुंचती है। किसी के ऊपर भार न बनते हुए वह अपने सारे काम खुद ही पूरा करती है।
सीमा के स्कूल के शिक्षक आदि भी उसके जज्बे की तारीफ करते हैं। वे बताते हैं कि दिव्यांग होने के बावजूद भी सीमा एक पैर के सहारे ही पगडंडियों से स्कूल आती हैं। अपने सभी कार्य और स्कूल का होमवर्क आदि भी सीमा समय से करती हैं। सीमा की मां के अनुसार उनके पास इतने पैसे नहीं है कि सीमा के लिए कॉपी-किताब आदि खरीद सके। सीमा के हौसले को देखते हुए स्कूल के शिक्षकों की ओर से यह सब मुहैया कराया जाता है। सभी को सीमा पर गर्व है और विश्वास है कि वह घरवालों का नाम रौशन करेंगी। सीमा का सपना बड़ी होकर टीचर बनने का है। वह पढ़-लिख कर इस काबिल बनना चाहती है ताकि परिवार की मदद कर सके। इसलिए ही सीमा ने जिद कर के स्कूल में अपना नाम लिखाया है।