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कब से शुरू होगी भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा?

भारत देश के ओड़िशा राज्य के तटवर्ती शहर पूरी में भगवान जगन्नाथ का विशाल मंदिर है। जगन्नाथ मंदिर को हिन्दू धर्म में चार धाम से से एक माना गया है। यहाँ हर वर्ष भगवान जगन्नाथ की भव्य रथ यात्रा निकाली जाती है, जो भारत ही नहीं वरन विश्व प्रसिद्ध है। जगन्नाथपुरी को मुख्यतः पुरी के नाम से जाना जाता है। इस वर्ष भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा 01 जुलाई को निकलेगी। जगन्नाथ रथ उत्सव 10 दिन का होता है, इस दौरान यहाँ देशभर से लाखों श्रद्धालु पहुँचते हैं। 

यात्रा में शामिल होने वालों को मिलता है पुण्य

हिन्दू धर्म के अनुसार भगवान जगन्नाथ को श्रीकृष्णजी का अवतार माना गया है। जिनकी महिमा का उल्लेख धार्मिक ग्रंथों एवं पुराणों में भी किया गया है। ऐसी मान्यता है कि जगन्नाथ रथयात्रा में भगवान श्रीकृष्ण और उनके भाई बलराम और बहन सुभद्रा का रथ शामिल होता है, जो इस रथयात्रा के दौरान इसमें शामिल होकर रथ को खींचते हैं तो उन्हें सौ यज्ञ के जितना पुण्य मिलता है। रथयात्रा के दौरान लाखों की संख्या में लोग शामिल होते हैं एवं रथ को खींचने के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ लगती है। जगन्नाथ यात्रा हिन्दू पंचाग के अनुसार आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को निकाली जाती है, जो इस वर्ष 1 जुलाई को निकलेगी। यात्रा में शामिल होने के लिए देश भर से श्रद्धालु यहां पहुँच रहें हैं। 

जगन्नाथपुरी की वार्षिक रथ यात्रा

मान्यताओं के अनुसार भगवान जगन्नाथ की बहन सुभद्रा ने एक दिन ने उनसे द्वारका के दर्शन करने की इच्छा जताई। तब भगवान जगन्नाथ ने सुभद्रा की इच्‍छा को पूरा करने के लिए उन्‍हें रथ में बैठाया और पूरे नगर का भ्रमण करवाया। इसके बाद से जगन्नाथपुरी की रथयात्रा की शुरुआत हुई थी। इस मंदिर का वार्षिक रथ यात्रा उत्सव पूरे विश्व में प्रसिद्ध है। इसमें मंदिर के तीनों मुख्य देवता यानी भगवान जगन्नाथ, उनके बड़े भाई बलभद्र और भगिनी सुभद्रा तीनों की तीनों की ही अलग-अलग भव्य और सुसज्जित रथ यात्रा निकाली जाती है

यात्रा की शुरुआत सबसे पहले बलभद्र जी के रथ से होती है। उनका रथ तालध्वज के लिए निकलता है। इसके बाद सुभद्रा के पद्म रथ की यात्रा शुरू होती है। सबसे अंत में भक्त भगवान जगन्नाथ जी के रथ ‘नंदी घोष’ को बड़े-बड़े रस्सों की सहायता से खींचना शुरू करते हैं। रथ यात्रा पूरी कर भगवान जगन्नाथ को उनके भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ मुख्य मंदिर से ढाई किमी दूर प्रसिद्ध गुंडिचा माता मंदिर पहुंचाया जाता हैं, जहां भगवान 7 दिनों तक आराम करते हैं। इसके बाद भगवान जगन्नाथ की वापसी की यात्रा शुरु होती है।